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दिल्ली: दाखिले से पहले वाहनों से लिया जाएगा शुल्क

Tue, 13 Oct 2015 12:54 PM IST
Updated Tue, 13 Oct 2015 12:54 PM IST
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Fees will be charged to vehicles entering in Delhi

राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में दाखिल होने वाले व्यावसायिक वाहनों से पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क वूसलने  का आदेश दिया है।

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हालांकि यात्री बसों, एंबुलेंस, ऑयल टैंकर व खाद्य सामग्री समेत आवश्यक वस्तुओं को ढोने वाले वाहनों को इस शुल्क से मुक्त रखा गया है। यह शुल्क एक नवंबर से चार महीने यानी 29 फरवरी 2016 तक प्रयोगिक तौर पर प्रभावी रहेगा।

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शीर्ष अदालत ने साफ किया किया है कि यह आदेश किसी अन्य अथॉरिटी द्वारा दिए आदेशों को निष्प्रभावी कर देगा। मालूम हो कि बुधवार को राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण(एनजीटी) ने दिल्ली में भारी व्यावसायिक वाहनों पर पर्यावरण शुल्क लगाने का आदेश दिया था।
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शुल्क टोल टैक्स के अतिरिक्त होगा

Fees will be charged to vehicles entering in Delhi

चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने लाइट ड्यूटी व्हीकल और दो एक्सल वाले ट्रकों से 700 रुपये और तीन एक्सल एवं उससे अधिक एक्सल वाले ट्रकों से 1300 रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क वसूलने का निर्देश दिया है। यह शुल्क टोल टैक्स के अतिरिक्त होगा।


पीठ ने सेमवार को अपने आदेश में कहा है कि टोल टैक्स बचाने के लिए व्यावसायिक वाहन दिल्ली से होकर गुजरते हैं। जिस कारण राजधानी में प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है। दिल्ली वासियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो रही है।

लिहाजा इस परेशानी से निपटने केलिए दिल्ली में दाखिल होने वाले व्यावसायिक वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाना आवश्यक है। राजधानी की परिवहन व्यवस्था में सुधार करना और सड़कों को साइकिल चालकों और पैदलयात्रियों के अनुकूल बनाना है।

शुल्क टोल ऑपरेटर के द्वारा वसूला जाएगा

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पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क टोल ऑपरेटर के द्वारा वसूला जाएगा और वह भी बिना किसी रियायत के। टोल ऑपरेटरों को हर शुक्रवार यह राशि दिल्ली सरकार को सौंपनी होगी। हर तिमाही दिल्ली सरकार को वसूले गए शुल्क की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी।


उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सरकार को बड़े होर्डिंग्स लगा कर व्यावसायिक वाहनों को वैकल्पिक हाईवे का इस्तेमाल करने केलिए कहा गया है। तीन राज्य सरकारों को सुनिशि्चित करने केलिए कहा गया है कि दिल्ली छोड़ अन्य गंतव्य को जाने वाले वाहनों वैकल्पिक मार्गों को चुनें।

दिल्ली सरकार को भी विज्ञापन केजरिए व्यावसायिक  वाहनों को बाईपास रूट लेने के लिए कहा जाना चाहिए। साथ ही दिल्ली में दाखिल होने वाले व्यावसायिक वाहनों से पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क वसूलने केबारे जानकारी भी दी जाए।

एंट्री प्वाइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश

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टोल कलेक्टर को 30 नवंबर तक अपने खर्च पर राजधानी के नौ एंट्री प्वाइंट पर रेडिया फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) सिस्टम लगाने के लिए कहा है और 31 जनवरी 2016 तक बाकी बचे 118 प्वाइंट पर आरएफआईडी सिस्टम लगाने के लिए कहा है।


आरएफआईडी डाटा दिल्ली नगर निगम और  दिल्ली सरकार के परिवहन निगम को मुहैया कराया जाएगा। दिल्ली सरकरा को नौ एंट्री प्वाइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया गया है। सरकार को औचक निरीक्षण कर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क वसूलने से संबंधित प्रक्रिया पर निगरानी रखने केलिए कहा गया गया है।

ईपीसीए की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 23 फीसदी व्यावसायिक वाहन और 40 से 60 फीसदी भारी वाहन दिल्ली में प्रवेश करते हैं, जबकि उनका गंतव्य दिल्ली नहीं होता है।

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