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आई जस्ट स्टैंड...कहते ही फूटकर रो पड़े फादर, लडख़ड़ाती जुबां से कहा मैं खुश हूं  

Fri, 29 Sep 2017 09:32 AM IST
अरुण कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
अरुण कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 29 Sep 2017 09:32 AM IST
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Father Tom after re lease from ISIS clutches came at delhi
demo pic - फोटो : File Photo

आईएसआईएस के चंगुल से बचकर सकुशल लौटने वाले फादर टॉम उजहूनालिल ने कहा कि जब बुरे लोग आप पर अत्याचार करते हैं तो जीसस आपकी मदद करते हैं। भावुक आवाज में उन्होंने कहा जीसस के मार्ग पर चलो और खुद पर विश्वास रखो।

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जीपीओ चर्च में कुल आठ मिनट के अपने सम्बोधन में फादर इतने भावुक हुए कि करीब तीन मिनट तक उनकी आंखो में आंसू वहते रहे। लडख़ड़ाती जुबान से उन्होंने देश कि सभी हिन्दू और मुस्लिम भाईयों-बहनों को शुक्रिया भी अदा किया।
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केरल से दिल्ली पहुंचे फादर टॉम उजहूनालिल को देखने के लिए चर्च में उनके चाहने वालों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। वह शाम के समय करीब साढ़े 4 बजे जीपीओ स्थित चर्च पहुंचे। उनके साथ अन्य पादरी भी थे। चर्च में पहुंचने के बाद सबसे पहले उन्होंने प्रार्थनाओं की औपचारिकताएं पूरी की।
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अपने चाहने वालों को सम्बोधित करते हुए फादर ने भावुक होकर कहा आई जस्ट स्टैंड...। आगे एक सन्नाटा छा गया और फिर कुछ सेंकेंड में ही भरकर रो पड़े फादर। खुद को संभालते हुए कहा मैं खुश हूं...।

उन्होंने न सिर्फ जीसस का बल्कि भारत के हिन्दू और मुस्लिम भाईयों-बहनों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि आज अगर मैं जिंदा हूं तो इसके पीछे मेरे चाहने वालों की प्रार्थनाएं ही हैं। उनके सम्बोधन के लिए चर्च में इतनी भीड़ उमड़ी की चर्च हॉल से बाहर तक लोगों की भीड़ लगी रही।

फादर ने यूं बयां की आईएसआईएस के गढ़ की आपबीती
आईएसआईएस के बारे में पूछने में उन्होंने सहज लफ्जों में कहा कि जब मैं बीमार हुआ तो उन्होंने मुझे दवाईयां दी, मुझे खाना दिया, लेकिन उनके सामने मैंने अपनी भावनाओं पर काबू रखा।

उन्होंने कहा कि वहां की कैद में सब तरह के लोग थे, कुछ मेरे साथ भी रहते थे और मुझे प्यार भी करते थे, मेरी बाते सुनते थे। उनके साथ रहकर मुझे सुकून भी मिलता था। उन्होंने आपबीती बताते हुए हर वाक्य में जीसस का शुक्रिया किया।


18 महीनों तक यातनाएं झेलने के बावजूद उन्होंने आईएसआईएस के खिलाफ कोई भी कटु शब्द नहीं बोले। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि फादर जीसस की उस सीख पर खड़े रहे जिसमें कहा गया है कि दुश्मन चाहे आपको नुक्सान पहुंचा दे, लेकिन आप उसके प्रति भी अपने भाव विनम्र ही रखें। 
 

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