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फादर्स डे पर असहनीय हो जाता है इनका दर्द
ब्यूरो्/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sun, 15 Jun 2014 09:04 AM IST
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जिस मां-बाप ने अपने बच्चों को उंगली पकड़कर चलना सिखाया और अपना पेट काटकर पालन पोषण किया, आज उन्हीं बेटों ने अपने बुजुर्ग पिता को उनके हाल पर छोड़ दिया है। बेटों की इस बेरुखी से दर्जनों बुजुर्ग पिता वृद्धाश्रम में जीवन काटने को मजबूर हैं।
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फादर्स डे की पूर्व संध्या पर फरीदाबाद के एनआईटी-2 स्थित ताऊ देवीलाल वृद्धाश्रम में रहने वाले दर्जनों पिता ने अमर उजाला से अपने दिल के दर्द को साझा किया। इस आश्रम में 60 साल से लेकर 85 साल तक के बुजुर्ग पिता अपने जीवन के बचे हुए वक्त को काट रहे हैं।
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उन्हें अपने बेटों से न तो कोई उम्मीद है और न ही कोई आशा। आश्रम में केवल फरीदाबाद के ही नहीं, बल्कि करनाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और यहां तक कि नेपाल के बुजुर्ग भी रह रहे हैं।
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सुनिए क्या कहते हैं?
1-दिल्ली के रमेश नगर निवासी 68 वर्षीय खुशहाल चंद ने कहा कि ऑटो चलाकर बेटे सुनील को पालकर बड़ा किया। इस आशा के साथ कि वह बुढ़ापे की लाठी बनेगा, लेकिन सहारा देने की बात तो दूर, बल्कि बड़ा होने पर उसने घर में रहना मुश्किल कर दिया। सवा दो साल से पत्नी शांति देवी के साथ वृद्ध आश्रम में समय गुजार रहे हैं।
2-कासगंज यूपी के रहने वाले 73 वर्षीय रमेश चंद ने फरीदाबाद स्थित हैदराबाद इंडस्ट्रीज में 30 साल तक नौकरी की। बेटे नितिन के लिए बल्लभगढ़ में 50 गज का मकान भी बना दिया, लेकिन उसे बूढ़े मां-बाप रास नहीं आए। आंखों में आंसू लिए रमेश चंद ने बेटे के जुल्म को बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि जिस बेटे को वह पाल रहे हैं, वही एक दिन उन पर सितम ढाएगा, लेकिन शायद कुदरत को यही मंजूर था। बेटे ने न केवल मार पिटाई की, बल्कि घर से भी बेघर कर दिया। पिछले 5 साल से पत्नी के साथ आश्रम में समय काट रहे हैं।
3-करनाल के रहने वाले 70 वर्षीय महंत जवाहर गिरी व खुर्जा बुलंदशहर के रहने वाले 65 वर्षीय राजपाल का भी यही दर्द है। बेटों ने उन्हें बेघर करके आश्रम में रहने को मजबूर कर दिया। यह हाल केवल इन चार बुजुर्गों का ही नहीं है, बल्कि यहां रहने वाले बदायूं के 70 वर्षीय बनवारी लाल, ओडिशा के 76 वर्षीय ओम प्रकाश, मेरठ के 69 वर्षीय नारायण दास, नेपाल निवासी टेक नारायण, रामदास कपूर, मनोहर लाल, धर्मपाल, महेंद्र कुमार, भगत राम, मलूक चंद और कमल नयन जैसे दो दर्जन बुजुर्गों का भी है।