हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, पासपोर्ट पर पिता का नाम लिखना अनिवार्य नहीं
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि पासपोर्ट अथॉरिटी यात्रा दस्तावेज में आवेदक को पिता के नाम का उल्लेख करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि पासपोर्ट में पिता का नाम दर्ज करना कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने मई माह में इसी मुद्दे पर दिए फैसले का हवाला देते हुए जिला पासपोर्ट कार्यालय को निर्देश दिया कि वे याची को बिना पिता का नाम दर्ज करवाएं पासपोर्ट जारी करे।
अदालत ने कहा कि कहा कि जिला पासपोर्ट कार्यालय द्वारा याची युवक के पासपोर्ट के नवीकरण के लिए जैविक पिता के नाम का उल्लेख नहीं करने पर पासपोर्ट जारी न करने का निर्णय गलत है। विभाग ने याची का पासपोर्ट हाल ही में रद्द कर दिया था जो जून 2017 तक वैध था।
बेटा नहीं चाहता पिता का नाम
याची युवक ने अदालत को बताया कि उसका पासपोर्ट जून 2007 तक के लिए जारी किया गया था और उसने उसके नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। याची ने कहा कि उसकी मां ने पिता से 2003 में उपेक्षा के कारण पिता से तलाक ले लिया था।
ऐसे में वह पिता का नाम पासपोर्ट पर दर्ज नहीं करवाना चाहता। उसके अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में एक कोर्स के लिए जाना है जो अगले साल जून में खत्म हो जाएगा।
पासपोर्ट अथॉरिटी के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि आवेदन पत्र में पिता का नाम देना अनिवार्य है और उसी के बाद सॉफ्टवेयर आवेदन पिता के नाम के बिना स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा है कि तलाक के बाद पिता का नाम न लेने को जायज ठहराया जा सकता है लेकिन माता-पिता के लिए बच्चा कानूनी रूप से अस्वीकृत नहीं हो जाता।
अदालत ने अपने आदेश में इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आप तुरंत अपने सॉफ्टवेयर में तेजी से सुधार करें ताकि वह बिना पिता के नाम के आवेदन को स्वीकार कर सके। अदालत के अधिकारियों को तीन दिनों के भीतर याची को पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया है।