दुर्घटना के बाद पिता हुए लाचार, पढ़ने में होशियार बेटी को गुरु ने ले लिया गोद
जहां समाज में कुछ लोग अभी भी बेटियों को बोझ समझते हैं, वहीं एक गुरु ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना का संदेश सार्थक कर रहे हैं। प्राइमरी स्कूल के इस शिक्षक ने एक व्यक्ति को पैरालाइसिस होने के बाद उसकी बेटी को गोद ले लिया। बेटी को पढ़ाने में लाचार पिता का सपना अब बिटिया का गुरुजी साकार कर रहे हैं।
औरंगाबाद क्षेत्र के गांव बांसुरी निवासी बुद्धपाल की 10 वर्षीया बेटी रितिका पढ़ाई में होशियार है। करीब तीन साल पहले बुद्धपाल सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। उनका उपचार हुआ लेकिन शरीर के एक भाग पर पैरालाइसिस हो गया।
इसके बाद रितिका की पढ़ाई छूट गई। मां मजदूरी करके घर का खर्च चलाने लगी। गांव कोठरा कुरैना में सहायक अध्यापक राहुल यशवर्धन ने रितिका के स्कूल नहीं आने का कारण जाना तो उन्हें पूरी घटना की जानकारी हुई।
सभी खर्च उठाते हैं राहुल
इसके बाद राहुल ने रितिका की पढ़ाई शुरू कराते हुए उसे ‘गोद’ ले लिया। उसकी पढ़ाई-लिखाई से लेकर सभी खर्च राहुल उठाते हैं। राहुल ने उसकी हायर एजुकेशन से लेकर शादी तक का जिम्मा लिया है। रितिका के पिता का सपना था कि वह पढ़-लिखकर अफसर बने। खुद रितिका भी बढ़े होकर अफसर बनना चाहती है।
रितिका के पिता की लाचारी से यह सपना टूटने लगा था, लेकिन प्राइमरी स्कूल के इस शिक्षक के कारण अब उसके हौसलों को पंख लगे हैं। वह दोबारा अफसर बनने का सपना देख रही है। वह स्कूल में पढ़ने वाले करीब 200 बच्चों में सबसे होशियार व संस्कारी है।
यह पहल समाज को बड़ा संदेश देती है। इससे समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक संदेश जाता है। बेटियों को बोझ समझने वाले लोगों के लिए ऐसी सोच करारा जवाब है। -आंजनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी