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'जान भले चली जाए, जमीन पर कब्जा नहीं करने देंगे'
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sun, 25 Oct 2015 09:42 AM IST
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पिछले करीब साढे़ चार साल से मेवात जिला के गांव रेवासन में धरने पर बैठे 9 गावों के किसानों ने शुक्रवार को महापंचायत कर एलान किया कि उनकी जान चली जाये पर 1600 एकड जमीन पर सरकार को किसी भी कीमत पर कब्जा लेने नहीं देगें।
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इस मौके पर भारी संख्या में महिला किसान और किसानों ने अपने सिर पर सफेद कपडा यानि कफन बांध कर पंचायत की। किसानों की ये प्रतिक्रिया मेवात उपायुक्त द्वारा जबरजस्ती कब्जा लेने का आदेश दिये जाने के बाद आई है।
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शुक्रवार की जुमा की नमाज भी किसानों ने धरना स्थल पर ही पढी। मेवात किसान संघर्ष समिति ने एक सप्ताह बाद धरना स्थल पर ही देश के किसान संगठनों की महापंचायत बुलाने का भी फैंसला लिया गया।
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वहीं 9 गावों के स्कूलों को विरोध रूप शुक्रवार से बंद रखने का फैंसला किया गया। आप को बता दें कि हरियाणा सरकार ने मेवात जिला के खण्ड नूंह के रोजका मेव, महरौला, खेडीकंकर, रूपाहेडी, धीरधूका, बढेला, बहादुरी, रेवासन और कवंरसीका सहित 9 गांवो के किसानों की करीब 1600 एकड जमीन आईएमटी इंडसट्रियल ऐरिया बनाने के लिये वर्ष 2008 में अधिग्रहण की थी।
सरकार ने सारी प्रक्रिया पूरी कर वर्ष 2010 से किसानों को मुबाजवा देना शुरू किया था। सरकार द्वारा किसानों को केवल 16 लाख रूपये बेसिक रेट पर मुआवजा दिये जाने से किसान नाराज हो गये और किसान सोहना की तर्ज पर मुआजा देने की मांग करने लगे।
जब सरकार ने किसानों को सोहना की तर्ज पर मुआवजा देने से मना कर दिया तो 24 मई 2011 से 9 गावों के किसान रेवासन में धरने पर बेठ गये। ये धरना जून 2013 तक चला।
किसान नेता सोहराब खां, सिराजुदीन, किसान नेता आजाद खान का कहना कि सरकार ने उनसे जो समझोता किया था उसके अनुसार 46 लाख रूपये मुआवजा और मुत प्लाट, कब्रिस्तानों, शमशानघाट, स्कूल, तालाब, ईदगांह, मस्जिद आदी की जमीन छोडने, सरकारी नोकरी देने जैसे वादे किये थे।
उन्होने कहा कि सरकार ने अपने वादे के अनुसार किसानों को 21 लाख रूपये दिये बाकी 25 लाख और प्लाट, नोकरी, कब्रिस्तान आदी की जमीन छोडने जैसी मांगे नहीं मानी जिसकी वजह से फिर से 9 गावों के किसान 17 जनवरी 2014 से धरने पर बेठ गये। उसके बाद किसी भी सरकार ने किसानों से कोई बात नहीं कि।
किसान नेता आजाद खां, दीनदार आदी का कहना है कि मेवात उपायुक्त अशौक सांगवान ने एक अखबार में दिये अपने इंट्रव्यू में कहा कि किसन एक सप्ताह में आईएमटी रोजका मेव जमीन से अपना कब्जा हटा लें नहीं तो किसानों से यह कब्जा जबरजस्ती भी लिया जा सकता है।
उन्होने बताया कि उसके बाद एक प्रतिनिधि मंडल उपायुक्त से मिला जहां किसानों के प्रितिनिधि मंडल को भी जमीन छोडने को कहा ने छोडने पर पुलिस द्वारा जबरजस्ती कब्जा लेने की धमकी दी।
किसानो का कहना है कि सकरार को किसी भी कीमत पर जमीन पर कब्जा लेने नहीं दिया जाऐगा। इसके लिये उन्होने आज से अपने सिर पर कफन बांध लिया है।
उन्होने कहा कि सरकार का कोई नुमाईदा अभी तक नहीं आया है। किसानों ने कहा कि पहले प्रसाशन बात करे अगर जबरजस्ती की गई तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।