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दूसरा पहलूः आंदोलन के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं किसान
Sat, 05 Dec 2020 06:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 05 Dec 2020 06:33 AM IST
सार
- देसी घी की पिन्नी, चने, मेवे व ठंडाई रख रही सेहत का ख्याल
- सांझे चूल्हे की तर्ज पर हजारों लोगों केलिए तैयार हो रहा देसी खाना
- बॉर्डर पर हर थोड़ी दूरी पर दवाई का लंगर कर रहा किसानों की मदद
- बीपी-शुगर, सर्दी-खांसी जुकाम की शिकायत होने पर तुरंत उपचार
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किसान बना रहे हैं ठंडाई...
- फोटो : amar ujala
विस्तार
नए कृषि कानून के विरोध में नौ दिन से सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान पीछे हटने को तैयार नहीं है। बॉर्डर पर एक और जहां पुलिस का जमावड़ा है तो दूसरी और हजारों की संख्या में किसान है। केंद्र सरकार से आर-पार की लड़ाई में लगे किसान अपनी सेहत से समझौता नहीं कर रहे हैं।
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पंजाब-हरियाणा के देसी खाने के साथ-साथ वह देसी घी की पिन्नी, चने, मेवे व ठंडाई का स्वाद भी ले रहे हैं। यह खाना-पीना सर्दियों के मौसम के हिसाब से तैयार किए जा रहा है। इससे कि किसी की सेहत बिगडने ना पाए। खाने के साथ दवाई के लंगर भी उनकी सेहत को दुरस्त करने में लगे हैं।
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सिंघु बॉर्डर पर बड़े-बड़े टैक्टरों व ट्रॉली के साथ किसान पहुंचे हुए हैं। बॉर्डर केचार से पांच किलोमीटर में छोटे-छोटे समूहों में किसान फैले हुए हैं। जहां उनकेलिए खाने-पीने, रहने की व्यवस्था इस तरह से की गई है कि वह सड़क पर ही छ: माह गुजार सकते हैं। बॉर्डर पर थोड़ी थोड़ी दूरी पर गुरूद्वारों की तरह खाने-पीने के काफी इंतजाम किए गए हैं।
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खाना भी ऐसा जिससे कि सेहत को किसी तरह से नुकसान ना हो। मेवे, काली-मिर्च, इलायजी, खरबूजे के बीज पीसकर ठंडाई बनाई जा रही है, तो कहीं देसी घी की पिन्नी खिलाकर उन्हें लंबे संघर्ष केलिए तैयार रहने को कहा जा रहा है। बीच-बीच में एक मुट्ठी जितने भुने चने खाकर आगे बढ़ रहे हैं, तो कहीं पैकेट में मेवे बांटे जा रहे हैं।
एक समय में दस हजार से अधिक के लिए बन रहा खाना
सांझे चूल्हा तो आपने सुना ही होगा, उसी तर्ज पर यहां हजारों लोगों केलिए एक साथ खाना तैयार किया जा रहा है। खाना भी ऐसा जिसमें मिर्च-मसाले कम हैं और सब्जियां भी मौसमी रखी गई हैं। अलग-अलग गुरुद्वारे से यह लंगर की विशेष व्यवस्था है। खाना इतना तैयार हो रहा है कि यहां पहुंच रहे अन्य लोगों को इसकी कमी ना पड़े। चावल, सब्जी, रोटी, दूध, चाय, फ्रूटी हर तरह की व्यवस्थाकी गई है एक तरह से यह जगह एक मिनी पंजाब में तब्दील है।
तैलीय खाना पहुंचा सकता है नुकसान
सिंघु बार्डर पर जिस तरह से खाने-पीने की व्यवस्था है, उससे किसान कई दिन सड़क पर आंदोलन जारी रख सकते हैं। बॉर्डर पर उनके खान-पान का काफी ध्यान रखा जा रहा है। अपोलो अस्पताल के सर्जरी विभाग में डायटिशियन दीबा सिद्दकी कहती हैं कि आहार संतुलित लेना जरुरी है। चूंकि वह शारीरिक गतिविधियां नहीं कर रहे तो अधिक घी व तेल का खाना उनके स्वास्थय को नुकसान पहुंचा सकता है। किसी की भी डाइट में सब्जी, रोटी, दाल चावल, दूध-दही व फल का होना अनिवार्य है। भुने चने व मेवे इम्यूनिटी बूस्टर का काम करते हैं।