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Faridabad News: कंजक पूजन के साथ की मां दुर्गा की आराधना, पंडालों में बंगाल की संस्कृति की दिखी झलक
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फरीदाबाद हार्डवेयर चौक के पास दुर्गाबाड़ी मंदिर में नवरात्रों के अवसर पर मां दुर्गा की पूजा करन
- फोटो : Archive
घरों से मंदिरों तक रही भक्तों की चहल-पहल, भजन और कठपुतली शो ने बांधा समा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नवरात्र के समापन पर शहर में भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला। घरों में कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर कंजक पूजन किया गया, वहीं मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। दूसरी ओर, दुर्गा उत्सव के पंडालों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने लोगों का ध्यान खींचा।
कहीं मां के भजनों से वातावरण भक्तिमय हुआ तो कहीं कठपुतली कला के माध्यम से बच्चों और बड़ों को नैतिक मूल्यों का संदेश दिया गया।सुबह से ही घरों में कंजक पूजन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को आमंत्रित कर उनके चरण धोए और विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद हलवा, पूरी, चने सहित अन्य प्रसाद खिलाकर उनका आशीर्वाद लिया। कई परिवारों ने सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना की। मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के दर्शन कर प्रसाद वितरित किया। कई लोग घरों से प्रसाद के पैकेट बनाकर लाए और कन्याओं को बांटे। घर के अलावा शहर में लोगों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना करके कन्याओं को प्रसाद वितरण किया।
कालीबाड़ी में गीतों और कठपुतली शो ने मोहा मन
फरीदाबाद कालीबाड़ी के 38वें शारदोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ बंगाल की कला और संस्कृति की झलक देखने को मिली। सांस्कृतिक कार्यक्रम में अर्पिता दास की गीत प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, जबकि शिल्पांजलि के फुल बॉडी पपेट शो ने बच्चों और बड़ों का मनोरंजन किया। कठपुतली प्रस्तुति के जरिये सत्य, ईमानदारी, सहयोग, एकता और करुणा जैसे जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया। इसने मनोरंजन के साथ लोककला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का महत्व भी उजागर किया। दुर्गा उत्सव के विभिन्न पंडालों में भी मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने उत्साह से भाग लिया। सजे हुए दुर्गा दरबार लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। महिलाएं, युवा और बच्चे भी आयोजन में बढ़-चढ़कर शामिल हुए।
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दशहरे पर होगी मां की विदाई
दुर्गा उत्सव के समापन पर दशहरे के दिन मां दुर्गा की विदाई की तैयारियां भी की जा रही हैं। बंगाली परंपरा के अनुसार, इस अवसर पर सिंदूर खेला का आयोजन होगा। इसमें महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगी। कालीबाड़ी में महानवमी के अवसर पर सुबह 6:30 बजे पूजा, 8:30 बजे पुष्पांजलि, 11:30 बजे लंगर वितरण और शाम सात बजे संध्या आरती का कार्यक्रम निर्धारित है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नवरात्र के समापन पर शहर में भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला। घरों में कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर कंजक पूजन किया गया, वहीं मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। दूसरी ओर, दुर्गा उत्सव के पंडालों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने लोगों का ध्यान खींचा।
कहीं मां के भजनों से वातावरण भक्तिमय हुआ तो कहीं कठपुतली कला के माध्यम से बच्चों और बड़ों को नैतिक मूल्यों का संदेश दिया गया।सुबह से ही घरों में कंजक पूजन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को आमंत्रित कर उनके चरण धोए और विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद हलवा, पूरी, चने सहित अन्य प्रसाद खिलाकर उनका आशीर्वाद लिया। कई परिवारों ने सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना की। मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के दर्शन कर प्रसाद वितरित किया। कई लोग घरों से प्रसाद के पैकेट बनाकर लाए और कन्याओं को बांटे। घर के अलावा शहर में लोगों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना करके कन्याओं को प्रसाद वितरण किया।
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कालीबाड़ी में गीतों और कठपुतली शो ने मोहा मन
फरीदाबाद कालीबाड़ी के 38वें शारदोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ बंगाल की कला और संस्कृति की झलक देखने को मिली। सांस्कृतिक कार्यक्रम में अर्पिता दास की गीत प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, जबकि शिल्पांजलि के फुल बॉडी पपेट शो ने बच्चों और बड़ों का मनोरंजन किया। कठपुतली प्रस्तुति के जरिये सत्य, ईमानदारी, सहयोग, एकता और करुणा जैसे जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया। इसने मनोरंजन के साथ लोककला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का महत्व भी उजागर किया। दुर्गा उत्सव के विभिन्न पंडालों में भी मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने उत्साह से भाग लिया। सजे हुए दुर्गा दरबार लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। महिलाएं, युवा और बच्चे भी आयोजन में बढ़-चढ़कर शामिल हुए।
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दशहरे पर होगी मां की विदाई
दुर्गा उत्सव के समापन पर दशहरे के दिन मां दुर्गा की विदाई की तैयारियां भी की जा रही हैं। बंगाली परंपरा के अनुसार, इस अवसर पर सिंदूर खेला का आयोजन होगा। इसमें महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगी। कालीबाड़ी में महानवमी के अवसर पर सुबह 6:30 बजे पूजा, 8:30 बजे पुष्पांजलि, 11:30 बजे लंगर वितरण और शाम सात बजे संध्या आरती का कार्यक्रम निर्धारित है।