हरियाणा का रण: आधी आबादी को नहीं मिला राजनीति में पूरा हक
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हर क्षेत्र में अपना परचम लहराने वाली महिलाओं (आधी आबादी) को विधानसभा चुनावों में राजनैतिक दलों ने उनका पूरा हक नहीं दिया है। विधानसभा चुनाव में जिले की छह विधानसभा सीटों पर मात्र पांच महिलाएं ही चुनावी रण में हैं।
इनमें भाजपा, आप इनेलो और स्वराज इंडिया ने एक-एक महिला को टिकट दिया है, जब एक महिला प्रत्याशी निर्दलीय ही मैदान में हैं। हरियाणा की महिलाओं ने खेल, साहित्य और बॉलीवुड तक अपनी प्रतिभा की धमक साबित की है। राजनीतिक रूप से भी काफी जागरूक हैं।
विधानसभा चुनाव में मतदान करने के मामले में महिलाएं पुरुषों आगे ही रही हैं, लेकिन उन्हें वह जगह नहीं मिली जिसकी हकदार थीं यानी उनका पूरा हक। इस बार भी भारतीय जनता पार्टी ने बड़खल से पार्टी की निवर्तमान विधायक सीमा त्रिखा को फिर से मैदान में उतारा है।
इनके अलावा एनआईटी विधानसभा से इनेलो ने जगजीत कौर पन्नू को, फरीदाबाद विधानसभा से आम आदमी पार्टी ने कुमारी सुमन लता को और स्वराज इंडिया ने रेनू खट्टर को टिकट दिया है। फरीदाबाद विस से ही सुशीला गौतम निर्दलीय ही चुनावी रण में अपनी किस्मत आजमा रहीं हैं।
तीन महिलाएं ही पहुंची विधानसभा
प्रदेश में 1967 से लेकर 2014 के बीच हुए 12 विधानसभा चुनावों में केवल 78 महिलाएं ही विधानसभा तक पहुंचने में कामयाब हो पाई हैं। इनमें फरीदाबाद जिले से अभी तक तीन महिलाएं ही विधानसभा में पहुंच पाई हैं।
बल्लभगढ़ विधानसभा से शारदा रानी 1968, 1972 और 1982 में तीन बार विधायक चुनी गई। वे राज्य सरकार में संसदीय सचिव और कैबिनेट स्तर की मंत्री रहीं। 1977, 1987 और 1991 में भी शारदा रानी चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गई। इसके बाद उन्होंने राजनीति से किनारा कर लिया।
इसी विधानसभा से कांग्रेस की टिकट पर शारदा राठौर 2005 और 2009 में कांग्रेस से चुनाव जीतीं और दोनों ही बार राज्य सरकार में मुख्य संसदीय सचिव रहीं। वर्ष 2014 के बड़खल विधानसभा से भाजपा ने सीमा त्रिखा को मैदान में उतारा और वे जीत कर चंडीगढ़ पहुंची। वर्ष 2009 में भी वे चुनाव लड़ी थीं, मगर कांग्रेस के महेंद्र प्रताप से हार गई थीं।