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Faridabad News: महिला का शव ठेले पर ले जाने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने अस्पताल प्रशासन से मांगा जवाब
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मौत के बाद भी सम्मान बनाए रखना अनुच्छेद 21 के तहत राज्य की जिम्मेदारी: आयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में महिला की मौत के बाद शव को ठेले पर ले जाने की घटना को हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक तथा फरीदाबाद के सीएमओ को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि आगामी 2 अप्रैल को निर्धारित सुनवाई से एक सप्ताह पहले तक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
मामला 28 जनवरी का है जब टीबी से पीड़ित 35 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि शव ले जाने के लिए न तो अस्पताल से एंबुलेंस मिली और न ही शव वाहन उपलब्ध कराया गया। निजी एंबुलेंस चालक द्वारा 700 रुपये की मांग किए जाने पर आर्थिक तंगी के चलते परिजन शव को जुगाड़ ठेले पर रखकर सरूरपुर स्थित घर तक ले गए।
आयोग ने इस घटना को मानव गरिमा के विरुद्ध बताते हुए इसे संवेदनहीनता का उदाहरण माना है। आयोग ने टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मृत्यु के बाद भी सम्मान बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और गरीब परिवार को अपमानजनक हालात में शव ले जाने के लिए मजबूर होना गंभीर चिंता का विषय है।
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साथ ही आयोग ने सरकार को सुझाव दिया है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए शव को निवास तक सम्मानपूर्वक पहुंचाने की निशुल्क व्यवस्था सुनिश्चित करने पर नीति बनाई जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में महिला की मौत के बाद शव को ठेले पर ले जाने की घटना को हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक तथा फरीदाबाद के सीएमओ को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि आगामी 2 अप्रैल को निर्धारित सुनवाई से एक सप्ताह पहले तक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
मामला 28 जनवरी का है जब टीबी से पीड़ित 35 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि शव ले जाने के लिए न तो अस्पताल से एंबुलेंस मिली और न ही शव वाहन उपलब्ध कराया गया। निजी एंबुलेंस चालक द्वारा 700 रुपये की मांग किए जाने पर आर्थिक तंगी के चलते परिजन शव को जुगाड़ ठेले पर रखकर सरूरपुर स्थित घर तक ले गए।
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आयोग ने इस घटना को मानव गरिमा के विरुद्ध बताते हुए इसे संवेदनहीनता का उदाहरण माना है। आयोग ने टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मृत्यु के बाद भी सम्मान बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और गरीब परिवार को अपमानजनक हालात में शव ले जाने के लिए मजबूर होना गंभीर चिंता का विषय है।
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साथ ही आयोग ने सरकार को सुझाव दिया है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए शव को निवास तक सम्मानपूर्वक पहुंचाने की निशुल्क व्यवस्था सुनिश्चित करने पर नीति बनाई जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी।