{"_id":"6026bb2f8ebc3ee9346694ef","slug":"posting-one-applicable-two-for-district-education-officer-faridabad-news-noi5653369148","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला शिक्षा अधिकारी के पद के लिए बढ़ी खींचतान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला शिक्षा अधिकारी के पद के लिए बढ़ी खींचतान
विज्ञापन
फरीदाबाद। इन दिनों जिला शिक्षा अधिकारी पद के लिए खींचतान बढ़ गई है। इस पद की दावेदार एक अधिकारी की पोस्टिंग को लेकर लड़ाई उच्च न्यायालय तक पहुंच गई है। जिले में तैनात मौलिक शिक्षा अधिकारी को गृहजनपद में ही नियुक्त करने का आरोप लगाते हुए पूर्व मौलिक शिक्षा अधिकारी रामकुमार फलसवाल ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रितू चौधरी की पोस्टिंग को चैलेंज किया है। इस याचिका पर16 मार्च को सुनवाई होनी है।
वहीं रीतू चौधरी का कहना है कि सर्विस बुक में उनका गृहजनपद रोहतक है। ऐसे में उनकी पोस्टिंग को चैलेंज नहीं किया जा सकता। वहीं कई अन्य अधिकारी भी उनके पूर्व कार्यकाल को लेकर सवाल खडे़ कर रहे हैं। अफसरों को कहना है कि उनके कार्यकाल में घपलेबाजी हुई थी। मौलिक अधिकारी का कहना है कि वह लोकायुक्त में विचाराधीन मामले में निर्दोष साबित हो चुकी हैं।
बता दें जनवरी में सतिंदर कौर वर्मा के सेवानिवृत होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी का पद खाली हुआ है। मौलिक शिक्षा अधिकारी रीतू चौधरी सहित कई अन्य अधिकारी इस पद के दावेदार हैं। ऐसे में अधिकारी एक दूसरे की पोल खोल कर विरोधियों का प्रमोशन रुकवाने में लगे हैं। इस कारण शिक्षा विभाग में एक के बाद एक घोटाले के आरोप लग रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
वहीं रीतू चौधरी का कहना है कि सर्विस बुक में उनका गृहजनपद रोहतक है। ऐसे में उनकी पोस्टिंग को चैलेंज नहीं किया जा सकता। वहीं कई अन्य अधिकारी भी उनके पूर्व कार्यकाल को लेकर सवाल खडे़ कर रहे हैं। अफसरों को कहना है कि उनके कार्यकाल में घपलेबाजी हुई थी। मौलिक अधिकारी का कहना है कि वह लोकायुक्त में विचाराधीन मामले में निर्दोष साबित हो चुकी हैं।
विज्ञापन
बता दें जनवरी में सतिंदर कौर वर्मा के सेवानिवृत होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी का पद खाली हुआ है। मौलिक शिक्षा अधिकारी रीतू चौधरी सहित कई अन्य अधिकारी इस पद के दावेदार हैं। ऐसे में अधिकारी एक दूसरे की पोल खोल कर विरोधियों का प्रमोशन रुकवाने में लगे हैं। इस कारण शिक्षा विभाग में एक के बाद एक घोटाले के आरोप लग रहे हैं।
विज्ञापन