{"_id":"6ad11993a737c0da990324b1","slug":"hgf-faridabad-news-c-24-1-pal1008-129190-2026-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: बॉटम<bha>--<\/bha><bha>--<\/bha> पराली नहीं जला रहे किसान, पशु चारे और अन्य कामों में कर रहे उपयोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: बॉटम<bha>--</bha><bha>--</bha> पराली नहीं जला रहे किसान, पशु चारे और अन्य कामों में कर रहे उपयोग
विज्ञापन
कृषि विभाग के जागरूकता अभियान का दिखने लगा असर
बहीन। सरकार की अपील और कृषि विभाग के जागरूकता अभियान का असर अब दिखाई देने लगा है। क्षेत्र के किसान धान की पराली जलाने के बजाय इसका उपयोग पशुओं के चारे और अन्य कार्यों में कर रहे हैं। इससे पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने में मदद मिल रही है।
कृषि विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। किसानों को बताया जा रहा है कि पराली जलाने से वायु प्रदूषित होती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इसके बजाय पराली का उपयोग पशुओं के चारे सहित अन्य कार्यों में किया जा सकता है।
अधिकारियों ने किसानों को यह भी बताया कि पराली जलाने पर सरकार की ओर से कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें संबंधित किसान के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री, प्राथमिकी और जुर्माना जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। किसानों से अपील की जा रही है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें, ताकि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
विज्ञापन
-- -अपने खेत में पराली जलाने के बजाय उसके गट्ठर बंधवा देता हूं। पास में बनी गत्ता फैक्टरी के संचालक इन गट्ठरों को ले जाते है। इससे खेत भी साफ हो गया और पराली जलाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
-- किसान भूपराम
- मैं कभी पराली नहीं जलाता। धान की कटाई के बाद खेत में पानी भरकर रोटावेटर से पराली की जुताई कर उसे मिट्टी में मिला देते हूं। इससे पराली गलकर जैविक खाद बनती है और खेत की उर्वरक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। - किसान राजू
- पराली का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में करता हूं । इससे भूसे की बचत होती है। इसके अलावा, बचे हुए भूसे को बेचकर आमदनी भी हो जाती है। -किसान महेश
- मैं लंबे समय से धान की खेती कर रहा हूं और हर बार पराली को गहरी जुताई करके खेत में ही मिला देता हूं। इसका लाभ मुझे अगली फसल में मिलता है। पराली को खेत में मिलाने से दूसरे खेतों की तुलना में मेरे खेत में पैदावार अधिक होती है।-- किसान रामबीर
विज्ञापन
बहीन। सरकार की अपील और कृषि विभाग के जागरूकता अभियान का असर अब दिखाई देने लगा है। क्षेत्र के किसान धान की पराली जलाने के बजाय इसका उपयोग पशुओं के चारे और अन्य कार्यों में कर रहे हैं। इससे पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने में मदद मिल रही है।
कृषि विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। किसानों को बताया जा रहा है कि पराली जलाने से वायु प्रदूषित होती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इसके बजाय पराली का उपयोग पशुओं के चारे सहित अन्य कार्यों में किया जा सकता है।
विज्ञापन
अधिकारियों ने किसानों को यह भी बताया कि पराली जलाने पर सरकार की ओर से कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें संबंधित किसान के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री, प्राथमिकी और जुर्माना जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। किसानों से अपील की जा रही है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें, ताकि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
विज्ञापन
- मैं कभी पराली नहीं जलाता। धान की कटाई के बाद खेत में पानी भरकर रोटावेटर से पराली की जुताई कर उसे मिट्टी में मिला देते हूं। इससे पराली गलकर जैविक खाद बनती है और खेत की उर्वरक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। - किसान राजू
- पराली का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में करता हूं । इससे भूसे की बचत होती है। इसके अलावा, बचे हुए भूसे को बेचकर आमदनी भी हो जाती है। -किसान महेश
- मैं लंबे समय से धान की खेती कर रहा हूं और हर बार पराली को गहरी जुताई करके खेत में ही मिला देता हूं। इसका लाभ मुझे अगली फसल में मिलता है। पराली को खेत में मिलाने से दूसरे खेतों की तुलना में मेरे खेत में पैदावार अधिक होती है।