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Faridabad News: तपती धूप में उबलती सड़क पर बैठे कर्मचारी, जाम से आमजन बेहाल

Tue, 14 Apr 2026 12:47 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2026 12:47 AM IST
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Employees sit on the scorching road under the blazing sun, while the general public suffers amidst the traffic jam.
निजी इकाइयों के कर्मचारियों ने 16 घंटे की ड्यूटी और कम वेतन का लगाया आरोप
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3 से 5 घंटे तक हाईवे सर्विस रोड पर जाम से आमजन बेहाल
वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सोमवार सुबह सेक्टर-25 और सेक्टर-37 सराय ख्वाजा में करीब चार से पांच हजार की संख्या में निजी कंपनियों के कर्मचारी वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और देखते ही देखते हाईवे के सर्विस रोड पर जाम की स्थिति बन गई।
मदरसन कंपनी के बाहर जुटे कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की। कर्मचारी सड़क पर बैठ गए, कई मजदूर बसों, कारों और यहां तक कि दीवारों पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे। तपती धूप में उबलती सड़क पर बैठे कर्मचारियों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। कुछ प्रदर्शनकारियों ने रास्ता पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे वाहन चालकों को अपने रास्ते बदलने पड़े। पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को साइड में बैठाने और वाहनों को निकालने की कोशिश करते नजर आए लेकिन भीड़ के आगे उनकी कोशिशें काफी देर तक नाकाफी साबित हुईं।
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कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनसे जबरन 16-16 घंटे ओवरटाइम कराया जाता है। मजदूरों का कहना है कि आज की महंगाई के दौर में उन्हें केवल 11 हजार से 13 हजार रुपये हाथ में मिलते हैं। उनके गणित के अनुसार, एक दिन की दिहाड़ी मात्र 333 रुपये बैठती है, जबकि काम के दबाव और महंगाई को देखते हुए यह कम से कम 600 रुपये होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि इतनी कम सैलरी में परिवार का गुजारा करना अब नामुमकिन हो गया है।
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व्यवस्था पर सवाल - न सैलरी स्लिप, न छुट्टी का अधिकार
मजदूरों के गुस्से का एक बड़ा कारण कंपनी की आंतरिक कार्यप्रणाली भी है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कभी सैलरी स्लिप नहीं दी जाती, जिससे उन्हें यह पता ही नहीं चलता कि उनके वेतन से खाने के कितने पैसे कटे और पीएफ या अन्य फंड में कितनी कटौती हुई। इसके अलावा, सरकारी छुट्टियों के बावजूद रविवार को वर्किंग डे बना दिया जाता है। पुराने और नए कर्मचारियों के बीच वेतन का कोई अंतर न होना भी वरिष्ठ कर्मचारियों में भारी रोष का कारण बना हुआ है। पांच साल से काम कर रहे अनुभवी मजदूर और आज भर्ती हुए नए लड़के का वेतन एक समान होना अन्याय बताया जा रहा है।

मौके पर चार थानों की पुलिस और प्रशासनिक दखल
जैसे ही सराय ख्वाजा में हाईवे जाम की सूचना मिली, एसएचओ राकेश कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आसपास के चार थानों की पुलिस को बुलाना पड़ा। कर्मचारियों ने गुस्से में कंपनी के गेट को भी तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने सूझबूझ से काम लेते हुए स्थिति को उग्र होने से बचा लिया। अंत में श्रम आयुक्त को मौके पर बुलाना पड़ा। उन्होंने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन और अन्य सुविधाएं दिलाई जाएंगी, जिसके बाद कर्मचारी शांत हुए। प्रदर्शन का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ा। सराय ख्वाजा में दिल्ली-आगरा हाईवे के सर्विस रोड पर करीब ढाई से तीन घंटे तक जाम लगा रहा। इस दौरान स्कूल बसें, एम्बुलेंस और ऑफिस जाने वाले लोग लंबी कतारों में फंसे रहे। कई लोग तो बिना गंतव्य पहुंचे ही वापस लौटने को मजबूर हो गए। सुबह के व्यस्त समय में लगे इस जाम ने शहर की रफ्तार को पूरी तरह थाम दिया।
बसों की छतों पर चढ़कर की नारेबाजी
प्रदर्शन का नजारा बेहद उग्र और भावुक करने वाला था। एक ओर पारा चढ़ रहा था और दूसरी ओर मजदूरों का गुस्सा। कर्मचारी हाथों में अपनी मांगों के बैनर लिए बसों और कारों की छतों पर चढ़ गए। हाईवे पर खड़ी बड़ी बसों की छतों पर दर्जनों कर्मचारी चढ़कर प्रबंधन के खिलाफ जोर-शोर से नारेबाजी कर रहे थे। कई कर्मचारी तो कंपनी की ऊंची दीवारों पर भी जा बैठे। भीषण गर्मी के बावजूद, दोपहर की चिलचिलाती धूप और उबलती कोलतार की सड़क पर हजारों कर्मचारी घंटों तक डटे रहे। उनके चेहरों पर पसीने की बूंदें और आंखों में भविष्य की चिंता साफ दिखाई दे रही थी, लेकिन वेतन वृद्धि की मांग को लेकर उनका संकल्प धूप से भी ज्यादा सख्त नजर आया।


सेक्टर-25 से लेकर सेक्टर-37 तक विरोध

सोमवार का दिन फरीदाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भारी रहा। केवल सेक्टर-37 ही नहीं, बल्कि सेक्टर-25 की कंपनियों में भी सुबह आठ बजे से ही वेतन वृद्धि को लेकर विरोध शुरू हो गया था। हालांकि, सेक्टर-25 में पुलिस की मुस्तैदी के चलते सुबह 11:30 बजे तक प्रदर्शन समाप्त हो गया, लेकिन सराय ख्वाजा का मोर्चा करीब पांच घंटे तक डटा रहा। दोपहर बाद जब अधिकारियों ने मांगों पर विचार करने का लिखित भरोसा दिया, तब जाकर मजदूरों ने सड़क खाली की और वाहनों की आवाजाही सुचारू हो सकी।
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