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Faridabad News: तेज हवा-बारिश ने किसानों पर बरपाया कहर, खेतों में बिछी बासमती, मंडी में भीगा धान
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- 1121 और 1718 किस्म की धान की फसल गिरने से उत्पादन और गुणवत्ता पर संकट
- बाजरे को भी नुकसान की आशंका, पेड़ टूटे, बिजली गुल होने से बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। फसल पककर तैयार हुई तो किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद थी, लेकिन तेज हवा के साथ हुई बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी। खेतों में लहलहा रही बासमती धान की 1121 और 1718 किस्म की फसल जमीन पर बिछ गई, जबकि नूंह अनाज मंडी में खुले में रखा धान बारिश में भीग गया। बाजरे समेत अन्य फसलों पर भी मौसम की मार है। कई जगह पेड़ टूटने और बिजली गुल होने से जनजीवन भी प्रभावित हुआ। कटाई के ऐन मौके पर मौसम बिगड़ने से किसानों को अब उत्पादन घटने और उपज का उचित भाव नहीं मिलने का डर सता रहा है।
तेज हवा और बारिश ने उन किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिनकी धान की फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी थी। खेतों में गिर चुकी फसल को काटने में अधिक मेहनत लग सकती है। नमी और प्रतिकूल मौसम के कारण दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने का भी खतरा है। किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर पहले ही मोटी रकम खर्च हो चुकी है। ऐसे में फसल खराब होने पर उनकी पूरी लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
- खेत में फसल गिरी, मंडी में भीग गया धान : नूंह अनाज मंडी में खुले में रखे धान के बारिश में भीगने से उसकी नमी बढ़ने की आशंका है। इससे गुणवत्ता प्रभावित होने और बिक्री के समय भाव में कटौती का डर बना हुआ है। किसानों और आढ़तियों के लिए अब भीगे धान को सुरक्षित रखना चुनौती बन गया है। वहीं, बाजरे की फसल को लेकर भी किसान नुकसान की आशंका जता रहे हैं। हालांकि, फसलों को वास्तविक रूप से कितना नुकसान हुआ है, इसका पता सर्वे या मौके पर निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा।
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- किसानों की चिंता, लागत निकालना भी होगा मुश्किल : किसान किशन सिंह का कहना है कि महीनों की मेहनत के बाद फसल तैयार होती है। किसान पहले ही खेती की बढ़ती लागत से परेशान हैं। ऐसे में कटाई से ठीक पहले तेज हवा और बारिश उनकी आर्थिक गणित बिगाड़ सकती है। किसान जुबेर ने कहा, 1121 और 1718 बासमती की फसल कटाई के लिए तैयार थी। तेज हवा ने खेतों में खड़ी फसल को गिरा दिया। अब कटाई में ज्यादा मेहनत लगेगी और दाने की गुणवत्ता खराब होने का डर भी है। इससे आमदनी पर असर पड़ सकता है।
किसान हेमराज के मुताबिक, मंडी में धान लेकर आए थे, लेकिन बारिश ने उसे भी भिगो दिया। धान में नमी बढ़ने से अच्छे भाव कम मिले। किसान के सामने अब फसल बचाने और नुकसान कम करने की चुनौती है। किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की स्थिति का जायजा लेने और नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। किसानों की नजर अब मौसम के अगले रुख पर है।
नूंह में आसपास अच्छी बारिश हुई है जिसमें धान और बाजरे की फसल में नुकसान की आशंका है, लेकिन अभी कितना नुकसान हुआ है इसका अनुमान नहीं लगाया गया है। जल्द ही फसल नुकसान का आकलन किया जाएगा। किसान अपनी फसल को सुखाकर मंडी लेकर आए ताकि पूरा भाव मिल सके। - डॉ अजीत सिंह, एसडीओ कृषि विभाग।
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- बाजरे को भी नुकसान की आशंका, पेड़ टूटे, बिजली गुल होने से बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। फसल पककर तैयार हुई तो किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद थी, लेकिन तेज हवा के साथ हुई बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी। खेतों में लहलहा रही बासमती धान की 1121 और 1718 किस्म की फसल जमीन पर बिछ गई, जबकि नूंह अनाज मंडी में खुले में रखा धान बारिश में भीग गया। बाजरे समेत अन्य फसलों पर भी मौसम की मार है। कई जगह पेड़ टूटने और बिजली गुल होने से जनजीवन भी प्रभावित हुआ। कटाई के ऐन मौके पर मौसम बिगड़ने से किसानों को अब उत्पादन घटने और उपज का उचित भाव नहीं मिलने का डर सता रहा है।
तेज हवा और बारिश ने उन किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिनकी धान की फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी थी। खेतों में गिर चुकी फसल को काटने में अधिक मेहनत लग सकती है। नमी और प्रतिकूल मौसम के कारण दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने का भी खतरा है। किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर पहले ही मोटी रकम खर्च हो चुकी है। ऐसे में फसल खराब होने पर उनकी पूरी लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
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- खेत में फसल गिरी, मंडी में भीग गया धान : नूंह अनाज मंडी में खुले में रखे धान के बारिश में भीगने से उसकी नमी बढ़ने की आशंका है। इससे गुणवत्ता प्रभावित होने और बिक्री के समय भाव में कटौती का डर बना हुआ है। किसानों और आढ़तियों के लिए अब भीगे धान को सुरक्षित रखना चुनौती बन गया है। वहीं, बाजरे की फसल को लेकर भी किसान नुकसान की आशंका जता रहे हैं। हालांकि, फसलों को वास्तविक रूप से कितना नुकसान हुआ है, इसका पता सर्वे या मौके पर निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा।
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- किसानों की चिंता, लागत निकालना भी होगा मुश्किल : किसान किशन सिंह का कहना है कि महीनों की मेहनत के बाद फसल तैयार होती है। किसान पहले ही खेती की बढ़ती लागत से परेशान हैं। ऐसे में कटाई से ठीक पहले तेज हवा और बारिश उनकी आर्थिक गणित बिगाड़ सकती है। किसान जुबेर ने कहा, 1121 और 1718 बासमती की फसल कटाई के लिए तैयार थी। तेज हवा ने खेतों में खड़ी फसल को गिरा दिया। अब कटाई में ज्यादा मेहनत लगेगी और दाने की गुणवत्ता खराब होने का डर भी है। इससे आमदनी पर असर पड़ सकता है।
किसान हेमराज के मुताबिक, मंडी में धान लेकर आए थे, लेकिन बारिश ने उसे भी भिगो दिया। धान में नमी बढ़ने से अच्छे भाव कम मिले। किसान के सामने अब फसल बचाने और नुकसान कम करने की चुनौती है। किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की स्थिति का जायजा लेने और नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। किसानों की नजर अब मौसम के अगले रुख पर है।
नूंह में आसपास अच्छी बारिश हुई है जिसमें धान और बाजरे की फसल में नुकसान की आशंका है, लेकिन अभी कितना नुकसान हुआ है इसका अनुमान नहीं लगाया गया है। जल्द ही फसल नुकसान का आकलन किया जाएगा। किसान अपनी फसल को सुखाकर मंडी लेकर आए ताकि पूरा भाव मिल सके। - डॉ अजीत सिंह, एसडीओ कृषि विभाग।