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Faridabad News: बिक्री घटी तो दुकानदारों ने 50 प्रतिशत तक सस्ते किए रावण के पुतले
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फरीदाबाद नीलम चौक पर रावण के पुतलों की लगी सेल। फोटो जोगेंद्र शर्मा
- फोटो : Archive
20 हजार रुपये वाला पुतला 14 हजार में, 10 हजार वाला छह हजार रुपये में मिल रहा
आज बिक्री बढ़ने की उम्मीद, मंगलवार के बाद पुतले रखे रह जाने की चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दशहरा से पहले बाजारों में हैंडमेड रावण के पुतलों की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं होने से दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। पिछले साल के मुकाबले इस बार बिक्री कम रहने के कारण दुकानदारों ने रविवार को ही पुतलों के दाम 40 से 50 प्रतिशत तक घटा दिए। एनआईटी, सेक्टर-15 और ओल्ड फरीदाबाद समेत जिले के विभिन्न बाजारों में अब ग्राहकों को कम कीमत पर रावण के पुतले मिल रहे हैं। दुकानदारों को उम्मीद है कि सोमवार और मंगलवार को बिक्री बढ़ेगी, लेकिन इसके बाद पुतले बिकने की संभावना ना के बराबर हो जाएगी।
बाजार में पहले 20 हजार रुपये में बिकने वाला रावण का पुतला अब 14 हजार रुपये में उपलब्ध है। इसी तरह 15 हजार रुपये वाले पुतले की कीमत घटाकर 10 से 11 हजार रुपये कर दी गई है। 10 हजार रुपये वाला पुतला छह हजार रुपये में मिल रहा है। वहीं, पांच से छह हजार रुपये वाले पुतलों के दाम घटाकर चार हजार रुपये तक कर दिए गए हैं। छोटे पुतलों की कीमत भी कम हुई है। एक से दो हजार रुपये तक में बिकने वाले पुतले अब 500 से एक हजार रुपये तक में मिल रहे हैं।
त्योहार के बाद नहीं बिकेंगे पुतले
दुकानदारों के अनुसार, दशहरे के लिए बिहार के औरंगाबाद और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से कारीगर शहर में आकर पुतले तैयार करते हैं। इसके लिए बांस, रंगीन कागज, लकड़ी और अन्य सामग्री पर खर्च किया जाता है। पुतले तैयार करने में मेहनत और समय भी लगता है। दशहरे के दिन के बाद इन पुतलों की मांग लगभग खत्म हो जाती है। ऐसे में दुकानदारों के पास इन्हें रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। इसी कारण नुकसान से बचने और लागत निकालने के लिए कीमतों में कटौती की गई है।
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व्यापारियों के कोट
पिछले साल के मुकाबले इस बार बिक्री कम है। ग्राहकों की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। इसलिए रविवार को पुतलों के दाम 40 से 50 प्रतिशत तक कम कर दिए हैं, ताकि त्योहार से पहले अधिक बिक्री हो सके। - विक्रम, व्यापारी, एनआईटी
हम हर साल दशहरे पर दुकान लगाकर हाथ से रावण के पुतले तैयार करते हैं। इस बार बिक्री कम होने से दाम घटाने पड़े हैं। मंगलवार के बाद पुतले बिकने मुश्किल हो जाएंगे और वे रखे रह जाएंगे। - रोहित, व्यापारी
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आज बिक्री बढ़ने की उम्मीद, मंगलवार के बाद पुतले रखे रह जाने की चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दशहरा से पहले बाजारों में हैंडमेड रावण के पुतलों की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं होने से दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। पिछले साल के मुकाबले इस बार बिक्री कम रहने के कारण दुकानदारों ने रविवार को ही पुतलों के दाम 40 से 50 प्रतिशत तक घटा दिए। एनआईटी, सेक्टर-15 और ओल्ड फरीदाबाद समेत जिले के विभिन्न बाजारों में अब ग्राहकों को कम कीमत पर रावण के पुतले मिल रहे हैं। दुकानदारों को उम्मीद है कि सोमवार और मंगलवार को बिक्री बढ़ेगी, लेकिन इसके बाद पुतले बिकने की संभावना ना के बराबर हो जाएगी।
बाजार में पहले 20 हजार रुपये में बिकने वाला रावण का पुतला अब 14 हजार रुपये में उपलब्ध है। इसी तरह 15 हजार रुपये वाले पुतले की कीमत घटाकर 10 से 11 हजार रुपये कर दी गई है। 10 हजार रुपये वाला पुतला छह हजार रुपये में मिल रहा है। वहीं, पांच से छह हजार रुपये वाले पुतलों के दाम घटाकर चार हजार रुपये तक कर दिए गए हैं। छोटे पुतलों की कीमत भी कम हुई है। एक से दो हजार रुपये तक में बिकने वाले पुतले अब 500 से एक हजार रुपये तक में मिल रहे हैं।
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त्योहार के बाद नहीं बिकेंगे पुतले
दुकानदारों के अनुसार, दशहरे के लिए बिहार के औरंगाबाद और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से कारीगर शहर में आकर पुतले तैयार करते हैं। इसके लिए बांस, रंगीन कागज, लकड़ी और अन्य सामग्री पर खर्च किया जाता है। पुतले तैयार करने में मेहनत और समय भी लगता है। दशहरे के दिन के बाद इन पुतलों की मांग लगभग खत्म हो जाती है। ऐसे में दुकानदारों के पास इन्हें रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। इसी कारण नुकसान से बचने और लागत निकालने के लिए कीमतों में कटौती की गई है।
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व्यापारियों के कोट
पिछले साल के मुकाबले इस बार बिक्री कम है। ग्राहकों की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। इसलिए रविवार को पुतलों के दाम 40 से 50 प्रतिशत तक कम कर दिए हैं, ताकि त्योहार से पहले अधिक बिक्री हो सके। - विक्रम, व्यापारी, एनआईटी
हम हर साल दशहरे पर दुकान लगाकर हाथ से रावण के पुतले तैयार करते हैं। इस बार बिक्री कम होने से दाम घटाने पड़े हैं। मंगलवार के बाद पुतले बिकने मुश्किल हो जाएंगे और वे रखे रह जाएंगे। - रोहित, व्यापारी