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अरावली की प्यास बुझाएगी यमुना: ददसिया से दमदमा तक 50 किमी पाइपलाइन का प्रस्ताव, 15 गांवों में पहुंचेगा पानी
Sun, 04 Oct 2026 12:03 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sun, 04 Oct 2026 12:03 PM IST
सार
फरीदाबाद में यमुना के अतिरिक्त मानसूनी पानी को अरावली क्षेत्र तक पहुंचाने की योजना को मंजूरी मिली है। करीब 50 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से 15 गांवों की खदानों और कृत्रिम झीलों में पानी पहुंचाया जाएगा। इससे पेयजल किल्लत घटाने और भूजलस्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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सीएम सैनी
- फोटो : ANI
विस्तार
फरीदाबाद में यमुना में मानसून के दौरान बढ़े जलस्तर का सदुपयोग कर अरावली क्षेत्र में पेयजल किल्लत दूर करने और भूजलस्तर बढ़ाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने महत्वाकांक्षी योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी के बाद अब सिंचाई विभाग परियोजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के लिए जल्द ही परामर्शदाता एजेंसी की सेवाएं लेगा। इसके लिए इस माह टेंडर लगाने की तैयारी शुरू हो गई है।
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प्रस्तावित योजना के तहत यमुना नदी के किनारे ददसिया गांव से पाइपलाइन बिछाकर अरावली पहाड़ी क्षेत्र तक पानी पहुंचाया जाएगा। पाइपलाइन को गुरुग्राम के दमदमा तक ले जाने की भी योजना है। इसकी लंबाई करीब 50 किलोमीटर होगी।
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प्रस्ताव के अनुसार, ददसिया गांव के पास यमुना में मानसून के दौरान बढ़े जलस्तर का पानी पाइपलाइन के माध्यम से उठाया जाएगा। यहां से पाइपलाइन तिलपत फायरिंग रेंज की ओर से आगे बढ़ेगी और बुढ़िया नाले के किनारे से होते हुए हाईवे को पार करेगी। इसके बाद अनंगपुर गांव के पास अरावली पहाड़ियों तक पानी पहुंचाया जाएगा। योजना में पाइपलाइन को आगे गुरुग्राम के दमदमा क्षेत्र तक ले जाने का भी प्रस्ताव है।
प्रस्तावित पाइपलाइन की क्षमता करीब 300 क्यूसेक प्रतिदिन पानी पहुंचाने की होगी। मानसून के दौरान यमुना में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहता है। इसी अवधि में नदी के अतिरिक्त पानी को अरावली क्षेत्र में बनी कृत्रिम झीलों और खदानों में पहुंचाने की योजना है। इससे बरसाती पानी को संरक्षित करने के साथ-साथ अरावली क्षेत्र में भूजलस्तर बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित पाइपलाइन की क्षमता करीब 300 क्यूसेक प्रतिदिन पानी पहुंचाने की होगी। मानसून के दौरान यमुना में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहता है। इसी अवधि में नदी के अतिरिक्त पानी को अरावली क्षेत्र में बनी कृत्रिम झीलों और खदानों में पहुंचाने की योजना है। इससे बरसाती पानी को संरक्षित करने के साथ-साथ अरावली क्षेत्र में भूजलस्तर बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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अरावली के 15 गांवों में बनी खदानों में डाला जाएगा पानी
योजना के तहत फरीदाबाद के अरावली क्षेत्र में स्थित पाली, मोहब्बताबाद, धौज, मांगर, कोट, खोरी, जमालपुर समेत करीब 15 गांवों के आसपास बनी खदानों और कृत्रिम झीलों में यमुना का पानी डाला जाएगा। इन जलाशयों में पानी का भंडारण होने के बाद इसे शोधित कर पेयजल के रूप में इस्तेमाल करने की परिकल्पना है।
योजना के तहत फरीदाबाद के अरावली क्षेत्र में स्थित पाली, मोहब्बताबाद, धौज, मांगर, कोट, खोरी, जमालपुर समेत करीब 15 गांवों के आसपास बनी खदानों और कृत्रिम झीलों में यमुना का पानी डाला जाएगा। इन जलाशयों में पानी का भंडारण होने के बाद इसे शोधित कर पेयजल के रूप में इस्तेमाल करने की परिकल्पना है।
इससे पहाड़ी क्षेत्र में गर्मी और मानसून के बाद होने वाली पेयजल किल्लत को कम करने में मदद मिल सकती है। सिंचाई विभाग परियोजना के तकनीकी पहलुओं पर काम करेगा। इसके लिए पाइपलाइन का मार्ग, पानी उठाने की व्यवस्था, पंपिंग सिस्टम, जल भंडारण क्षमता, उपचार संयंत्रों की जरूरत और पर्यावरणीय पहलुओं का अध्ययन कराया जाएगा। शोधित पानी को शहर में सप्लाई किया जाएगा।