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Faridabad News: सांप काटने के बाद जिला अस्पताल पहुंचे मजदूर को समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप
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परिजन बोले- एंटी-वेनम के लिए करते रहे इंतजार, निजी अस्पताल लेकर गए
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल की आपातकालीन सेवा में सांप काटने के बाद पहुंचे मजदूर को समय पर जरूरी उपचार नहीं मिलने का मामला सामने आया है। छांयसा निवासी गोपी चंद भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे काम के दौरान सांप ने उनके हाथ पर काट लिया।
परिजन उन्हें उपचार के लिए बीके अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि काफी देर तक मरीज की उचित देखरेख नहीं की गई। इस दौरान उसे चक्कर आने लगे। बाद में परिजन उसे उपचार के लिए निजी अस्पताल लेकर चले गए। गोपी चंद के दामाद संदीप ने बताया कि सांप के काटने के बाद वे पहले एक अन्य अस्पताल गए थे, जहां मरीज को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद उसे बीके अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों के अनुसार, करीब तीन बजे बीके अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज के हाथ में ग्लूकोज की बोतल लगा दी गई, लेकिन एंटी-वेनम सहित अन्य जरूरी उपचार के लिए उन्हें काफी देर इंतजार करना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि उपचार के संबंध में रूम नंबर 40 की ओपीडी में मौजूद कर्मचारी से जानकारी मांगी गई लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने से परिजन नाराज हो गए। मरीज की हालत बिगड़ती देख उन्होंने डॉक्टरों के खिलाफ नाराजगी जताई। इसी दौरान गुस्से में परिजनों ने आपातकालीन कक्ष में ही मरीज का पंजीकरण कार्ड फाड़ दिया और उसे निजी अस्पताल लेकर चले गए।
वर्जन
इस मामले की जानकारी नहीं है। यदि परिवार की ओर से शिकायत आएगी, तो इसकी जांच की जाएगी। -डॉ. विकास गोयल, कार्यवाहक, प्रधान चिकित्सा अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल की आपातकालीन सेवा में सांप काटने के बाद पहुंचे मजदूर को समय पर जरूरी उपचार नहीं मिलने का मामला सामने आया है। छांयसा निवासी गोपी चंद भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे काम के दौरान सांप ने उनके हाथ पर काट लिया।
परिजन उन्हें उपचार के लिए बीके अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि काफी देर तक मरीज की उचित देखरेख नहीं की गई। इस दौरान उसे चक्कर आने लगे। बाद में परिजन उसे उपचार के लिए निजी अस्पताल लेकर चले गए। गोपी चंद के दामाद संदीप ने बताया कि सांप के काटने के बाद वे पहले एक अन्य अस्पताल गए थे, जहां मरीज को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद उसे बीके अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों के अनुसार, करीब तीन बजे बीके अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज के हाथ में ग्लूकोज की बोतल लगा दी गई, लेकिन एंटी-वेनम सहित अन्य जरूरी उपचार के लिए उन्हें काफी देर इंतजार करना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि उपचार के संबंध में रूम नंबर 40 की ओपीडी में मौजूद कर्मचारी से जानकारी मांगी गई लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने से परिजन नाराज हो गए। मरीज की हालत बिगड़ती देख उन्होंने डॉक्टरों के खिलाफ नाराजगी जताई। इसी दौरान गुस्से में परिजनों ने आपातकालीन कक्ष में ही मरीज का पंजीकरण कार्ड फाड़ दिया और उसे निजी अस्पताल लेकर चले गए।
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इस मामले की जानकारी नहीं है। यदि परिवार की ओर से शिकायत आएगी, तो इसकी जांच की जाएगी। -डॉ. विकास गोयल, कार्यवाहक, प्रधान चिकित्सा अधिकारी