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अरावली में फिर काट दिए गए पेड़
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फरीदाबाद। अरावली में लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं। हाल ही में अरावली के मांगर और कोट गांव में घूमने गए कुछ पर्यावरण प्रेमियों ने वहां पेड़ कटे हुए देखे तो उन्होंने उसकी शिकायत हरियाणा के प्रधान वन संरक्षक को की है। शिकायतकर्ता के अनुसार, पेड़ काटने के साथ ही धौज गांव की झील के पास जमीन को समतल किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पेड़ों को काट व जमीन समतल कर वहां अवैध रूप से फार्म हाउस बनाने की तैयारी है।
अरावली संरक्षण में जुटे सिटीजन ग्रुप की सदस्य वैशाली राणा चंद्रा ने बताया कि पिछले दिनों उन्हें जानकारी मिली थी कि गांव मांगर और कोट में पेड़ काटे गए हैं। इस पर उनके साथ सिटीजन ग्रुप के सदस्य विवेक कंबोज और कर्नल (सेवानिवृत्त) एसएस ओबराय वहां गए तो देखा कि सैकड़ों पेड़ काटे गए हैं। इनमें मुख्य रूप से कीकर के अलावा पलाश और धाक के पेड़ के अलावा कई अन्य तरह के पेड़ काटे गए हैं। वैशाली राणा के अनुसार उन्होंने इसकी शिकायत फरीदाबाद के जिला वन अधिकारी को की थी। साथ ही उन्होंने हरियाणा वन विभाग के प्रधान वन संरक्षक को भेजी है।
वैशाली राणा के अनुसार, मांगर और कोट गांव में पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम की धारा 4 व 5 लगी हुई है। इसके तहत जंगल में किसी तरह का निर्माण व पेड़ों को नहीं काटा जा सकता है, मगर जिस तरह से पेड़ काटे गए हैं, उससे लगता है कि माफिया यहां से पेड़ों को काटकर बेच रहा है। इसके अलावा कई स्थानों पर पेड़ों को काटने के बाद जमीन को समतल किया गया है, जिससे वहां किसी तरह की अवैध निर्माण की आशंका है। वैशाली राणा ने बताया कि पेड़ों को काटने की गतिविधियों को रोकने और उन पर नजर रखने के लिए वहां कोई गार्ड भी तैनात नहीं है।
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अरावली संरक्षण में जुटे सिटीजन ग्रुप की सदस्य वैशाली राणा चंद्रा ने बताया कि पिछले दिनों उन्हें जानकारी मिली थी कि गांव मांगर और कोट में पेड़ काटे गए हैं। इस पर उनके साथ सिटीजन ग्रुप के सदस्य विवेक कंबोज और कर्नल (सेवानिवृत्त) एसएस ओबराय वहां गए तो देखा कि सैकड़ों पेड़ काटे गए हैं। इनमें मुख्य रूप से कीकर के अलावा पलाश और धाक के पेड़ के अलावा कई अन्य तरह के पेड़ काटे गए हैं। वैशाली राणा के अनुसार उन्होंने इसकी शिकायत फरीदाबाद के जिला वन अधिकारी को की थी। साथ ही उन्होंने हरियाणा वन विभाग के प्रधान वन संरक्षक को भेजी है।
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वैशाली राणा के अनुसार, मांगर और कोट गांव में पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम की धारा 4 व 5 लगी हुई है। इसके तहत जंगल में किसी तरह का निर्माण व पेड़ों को नहीं काटा जा सकता है, मगर जिस तरह से पेड़ काटे गए हैं, उससे लगता है कि माफिया यहां से पेड़ों को काटकर बेच रहा है। इसके अलावा कई स्थानों पर पेड़ों को काटने के बाद जमीन को समतल किया गया है, जिससे वहां किसी तरह की अवैध निर्माण की आशंका है। वैशाली राणा ने बताया कि पेड़ों को काटने की गतिविधियों को रोकने और उन पर नजर रखने के लिए वहां कोई गार्ड भी तैनात नहीं है।
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