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Faridabad News: सेक्टर-64, 65 की डिवाइडिंग रोड पर विकसित होगी ग्रीन बेल्ट

Sat, 13 Jun 2026 10:47 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jun 2026 10:47 PM IST
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A green belt will be developed on the dividing road between Sector 64 and 65.
करोड़ों रुपये की परियोजना से प्रदूषण पर लगेगी लगाम, तीन वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी निर्माण एजेंसी की होगी
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। लगातार बढ़ते शहरीकरण, धूल और वायु प्रदूषण से जूझ रहे ग्रेटर फरीदाबाद को हरियाली की बड़ी सौगात मिलने जा रही है। सेक्टर-64 और 65 की डिवाइडिंग रोड पर करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक ग्रीन बेल्ट विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना के जरिये सड़क के बीच और किनारों को हरा भरा बनाया जाएगा, इससे क्षेत्र की सुंदरता बढ़ने के साथ धूल के कणों और प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। खास बात यह है कि परियोजना पूरी होने के बाद तीन वर्षों तक इसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी निर्माण एजेंसी की होगी।

ग्रेटर फरीदाबाद पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। बड़ी आवासीय सोसाइटियों, चौड़ी सड़कों और बढ़ते यातायात के कारण इस क्षेत्र में हरित क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ा है। गर्मियों के दौरान खुले हिस्सों से उड़ने वाली धूल और वाहनों से निकलने वाला धुआं स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण बनता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क किनारे विकसित ग्रीन बेल्ट तापमान कम करने, धूल रोकने और वायु गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में यह परियोजना केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम मानी जा रही है।
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मजबूत फेंसिंग और सिंचाई व्यवस्था होगी तैयार

परियोजना के तहत पूरी डिवाइडिंग रोड पर मजबूत गैल्वेनाइज्ड वेल्डेड मेश फेंसिंग लगाई जाएगी ताकि पौधों को लावारिस पशुओं और अन्य नुकसान से बचाया जा सके। इसके साथ ही नियमित सिंचाई के लिए पानी के कनेक्शन और पाइपलाइन का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। सड़क किनारे स्थायी हेज और सजावटी पौधे लगाए जाएंगे, जो पूरे वर्ष हरियाली बनाए रखने के साथ धूल को नियंत्रित करने में भी सहायक होंगे।
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पौधे से पेड़ बनने तक होगी देखभाल

सरकारी परियोजनाओं में पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल नहीं होने की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं। इस बार परियोजना में विशेष प्रावधान किया गया है कि कार्य पूरा होने के बाद तीन वर्षों तक एजेंसी को अपने खर्च पर पौधों, फेंसिंग और अन्य संरचनाओं का रखरखाव करना होगा। यदि इस अवधि में पौधे सूखते हैं या किसी प्रकार की क्षति होती है तो उसे एजेंसी को ही दुरुस्त करना होगा। इससे ग्रीन बेल्ट लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावी बनी रह सकेगी।

प्रदूषण नियंत्रण के साथ शहर की सुंदरता भी बढ़ेगी

फरीदाबाद लंबे समय से वायु प्रदूषण और धूल की समस्या से प्रभावित शहरों में गिना जाता रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार सड़क किनारे विकसित हरित पट्टियां हवा में मौजूद सूक्ष्म धूल कणों को रोकने और वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर बेहतर बनाने में मदद करती हैं। इसके अलावा हरियाली शहरी तापमान को नियंत्रित करने और हीट आइलैंड प्रभाव को कम करने में भी उपयोगी मानी जाती है। ऐसे में यह परियोजना पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


खुदाई से पहले देनी होगी डिजिटल सूचना

परियोजना में आधुनिक व्यवस्था अपनाते हुए यह भी अनिवार्य किया गया है कि किसी भी प्रकार की खुदाई शुरू करने से पहले संबंधित एजेंसी को कॉल बिफोर यू डिग मोबाइल एप पर जानकारी दर्ज करनी होगी। इसका उद्देश्य जमीन के नीचे मौजूद बिजली, पानी और दूरसंचार लाइनों को नुकसान से बचाना है। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित एजेंसी जिम्मेदार होगी।

ग्रीनबेल्ट का काम जल्द शुरू कर दिया जाएगा। इससे सुंदरता बढ़ने के साथ प्रदूषण कम होने में मदद होगी। - देंवेंद्र भड़ाना, कार्यकारी अभियंता एफएमडीए
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