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अरिंदम हत्याकांड का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sun, 11 Nov 2018 09:20 PM IST
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फरीदाबाद। टाटा स्टील लॉजिस्टिक्स प्रा. लि. कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधक की दिनदहाड़े हत्या करने के आरोपी विश्वास पांडेय ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस को बताया कि उसने प्रयागराज (इलाहाबाद) से अरिंदम को मारने के लिए 90 हजार में पिस्तौल और कारतूस खरीदे थे। विश्वास को सीआईए सेक्टर-17 टीम ने मुखबिर की सूचना पर शनिवार रात सैनिक कॉलोनी मोड़ के पास से गिरफ्तार किया। वह सिंगापुर फरार होने के लिए चंडीगढ़ स्थित एक कंपनी से वीजा लेने जा रहा था कि पकड़ा गया।
पुलिस गिरफ्त में आए विश्वास पांडेय ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ प्रबंधक अरिंदम पाल, जीएम सुनीत वत्स, एचआर प्रभारी आनंद विवेक और प्रोडक्शन प्लानिंग इंचार्ज (पीपीसी) संदीप सिंह ने साजिश रच कर उसे नौकरी से निकलवा दिया था। करीब 11 साल से कंपनी में काम कर रहे विश्वास की सभी ग्राहकों से अच्छी जान पहचान थी। झगड़े का कारण ड्यूटी रोटेशन बनी। विश्वास के मुताबिक, वह सुबह 10 से शाम छह बजे की ड्यूटी करता था।
इसी समय सारे ग्राहकों से उसका संपर्क होता था। 1 मई से रोटेशनल शिफ्ट कर उसकी ड्यूटी रात में लगा दी गई। इस पर उसका संदीप सिंह से झगड़ा हुआ था। विश्वास का आरोप है कि अरिंदम पाल और सुनील वत्स ने उसे संदीप सिंह को मारने के लिए उकसाया था। उसने मारपीट की तो कंपनी ने जांच बैठा दी, जांच अधिकारी अरिंदम पाल को बनाया गया। अरिंदम पाल ने उसके खिलाफ गलत रिपोर्ट बना कर नौकरी से बर्खास्त करा दिया।
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करियर बर्बाद होने के कारण उसने बदला लेने की ठानी थी। दिवाली से कुछ दिन पहले ही वह प्रयागराज (इलाहाबाद) से 90 हजार रुपये में एक पिस्टल और 25 कारतूस खरीद कर लाया था। 9 नवंबर को कंपनी में घुसा और अरिंदम को पांच गोलियां मारने के बाद फरार हो गया था।
कई लोगों की हत्या करने के इरादे से पहुंचा था कंपनी
सीआईए प्रभारी विमल कुमार के मुताबिक, विश्वास पांडेय अरिंदम पाल के साथ ही सुनील वत्स, संदीप सिंह और आनंद पाल को भी जान से मारने की नीयत से पहुंचा था। वारदात को अंजाम देने के लिए विश्वास पांडेय पिस्टल की दो मैग्जीन पूरी तरह से भर कर पहुंचा था। उसने पांच गोलियां तो अरिंदम पाल को मारीं। बाकी गोलियां वह अन्य लोगों की हत्या करने के लिए रखे हुए था। अन्य लोगों के छिप जाने पर वह एक ही हत्या कर भाग निकला।
दिवाली में गोली चलाने का किया अभ्यास
विश्वास पांडेय ने बताया कि इलाहाबाद से पिस्तौल और गोलियां लाने के बाद उसने टारगेट सेट करने के लिए दिवाली की रात दिल्ली के एक पार्क में गोली चलाने का अभ्यास भी किया था। पिस्टल से दो गोलियां चलाकर उसने सुनिश्चित किया कि निशाना सही लग रहा है और पिस्टल फंसेगी नहीं।
सिंगापुर भागने की तैयारी में था विश्वास
विश्वास को सिंगापुर की एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पद पर जॉब मिल गई थी। उसने सिंगापुर जाने से पहले बदला लेने की साजिश रच डाली। सीआईए प्रभारी विमल कुमार के अनुसार, विश्वास को 11 नवंबर से 15 नवंबर के बीच सिंगापुर स्थित कंपनी में नौकरी ज्वाइन करनी थी। शनिवार की रात वह चंडीगढ़ स्थित आरएमआर नाम की वीजा कंपनी से अपना वीजा लेने के लिए निकला था। यदि वह चंडीगढ़ पहुंच जाता तो वीजा मिलने के बाद सिंगापुर फरार हो सकता था लेकिन इससे पहले ही टीम ने दबोच लिया।
...तो नहीं मिलेंगे चश्मदीद गवाह
सीनियर मैनेजर अरिंदम पाल की हत्या का विश्वास पांडेय को पछतावा नहीं है। पूछताछ में उसने पुलिस अधिकारियों से कहा कि उसे पकड़ तो लिया गया है लेकिन कंपनी में उसके खिलाफ कोई भी गवाही नहीं देगा। क्राइम ब्रांच प्रभारी विमल कुमार ने बताया कि हत्याकांड के संबंध में सुनील वत्स, आनंद विवेक और संदीप सिंह से अहम जानकारी मिल सकती हैं, कई बार बुलाए जाने के बावजूद यह तीनों व्यक्ति पुलिस से मिलने और जांच में सहयोग करने को तैयार नहीं हैं। विश्वास अरिंदम पाल सहित इन तीनों पर ही नौकरी से निकलवाने की साजिश रचने का आरोप लगा रहा है।
पुलिस को सीसीटीवी कैमरों की कमी खली
क्राइम ब्रांच प्रभारी विमल कुमार ने बताया कि टाटा स्टील एंड लॉजिस्टिक्स कंपनी में सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, कंपनी में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए, चार माह पूर्व निकाला गया कर्मचारी बिना किसी रोकटोक के हथियार लेकर प्रबंधक तक पहुंच गया और वारदात को अंजाम दे आराम से फरार भी हो गया। यदि कंपनी में सीसीटीवी कैमरे लगे होते तो वारदात की फुटेज मिलती जो जांच में अहम कड़ी साबित होती।
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पुलिस गिरफ्त में आए विश्वास पांडेय ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ प्रबंधक अरिंदम पाल, जीएम सुनीत वत्स, एचआर प्रभारी आनंद विवेक और प्रोडक्शन प्लानिंग इंचार्ज (पीपीसी) संदीप सिंह ने साजिश रच कर उसे नौकरी से निकलवा दिया था। करीब 11 साल से कंपनी में काम कर रहे विश्वास की सभी ग्राहकों से अच्छी जान पहचान थी। झगड़े का कारण ड्यूटी रोटेशन बनी। विश्वास के मुताबिक, वह सुबह 10 से शाम छह बजे की ड्यूटी करता था।
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इसी समय सारे ग्राहकों से उसका संपर्क होता था। 1 मई से रोटेशनल शिफ्ट कर उसकी ड्यूटी रात में लगा दी गई। इस पर उसका संदीप सिंह से झगड़ा हुआ था। विश्वास का आरोप है कि अरिंदम पाल और सुनील वत्स ने उसे संदीप सिंह को मारने के लिए उकसाया था। उसने मारपीट की तो कंपनी ने जांच बैठा दी, जांच अधिकारी अरिंदम पाल को बनाया गया। अरिंदम पाल ने उसके खिलाफ गलत रिपोर्ट बना कर नौकरी से बर्खास्त करा दिया।
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करियर बर्बाद होने के कारण उसने बदला लेने की ठानी थी। दिवाली से कुछ दिन पहले ही वह प्रयागराज (इलाहाबाद) से 90 हजार रुपये में एक पिस्टल और 25 कारतूस खरीद कर लाया था। 9 नवंबर को कंपनी में घुसा और अरिंदम को पांच गोलियां मारने के बाद फरार हो गया था।
कई लोगों की हत्या करने के इरादे से पहुंचा था कंपनी
सीआईए प्रभारी विमल कुमार के मुताबिक, विश्वास पांडेय अरिंदम पाल के साथ ही सुनील वत्स, संदीप सिंह और आनंद पाल को भी जान से मारने की नीयत से पहुंचा था। वारदात को अंजाम देने के लिए विश्वास पांडेय पिस्टल की दो मैग्जीन पूरी तरह से भर कर पहुंचा था। उसने पांच गोलियां तो अरिंदम पाल को मारीं। बाकी गोलियां वह अन्य लोगों की हत्या करने के लिए रखे हुए था। अन्य लोगों के छिप जाने पर वह एक ही हत्या कर भाग निकला।
दिवाली में गोली चलाने का किया अभ्यास
विश्वास पांडेय ने बताया कि इलाहाबाद से पिस्तौल और गोलियां लाने के बाद उसने टारगेट सेट करने के लिए दिवाली की रात दिल्ली के एक पार्क में गोली चलाने का अभ्यास भी किया था। पिस्टल से दो गोलियां चलाकर उसने सुनिश्चित किया कि निशाना सही लग रहा है और पिस्टल फंसेगी नहीं।
सिंगापुर भागने की तैयारी में था विश्वास
विश्वास को सिंगापुर की एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पद पर जॉब मिल गई थी। उसने सिंगापुर जाने से पहले बदला लेने की साजिश रच डाली। सीआईए प्रभारी विमल कुमार के अनुसार, विश्वास को 11 नवंबर से 15 नवंबर के बीच सिंगापुर स्थित कंपनी में नौकरी ज्वाइन करनी थी। शनिवार की रात वह चंडीगढ़ स्थित आरएमआर नाम की वीजा कंपनी से अपना वीजा लेने के लिए निकला था। यदि वह चंडीगढ़ पहुंच जाता तो वीजा मिलने के बाद सिंगापुर फरार हो सकता था लेकिन इससे पहले ही टीम ने दबोच लिया।
...तो नहीं मिलेंगे चश्मदीद गवाह
सीनियर मैनेजर अरिंदम पाल की हत्या का विश्वास पांडेय को पछतावा नहीं है। पूछताछ में उसने पुलिस अधिकारियों से कहा कि उसे पकड़ तो लिया गया है लेकिन कंपनी में उसके खिलाफ कोई भी गवाही नहीं देगा। क्राइम ब्रांच प्रभारी विमल कुमार ने बताया कि हत्याकांड के संबंध में सुनील वत्स, आनंद विवेक और संदीप सिंह से अहम जानकारी मिल सकती हैं, कई बार बुलाए जाने के बावजूद यह तीनों व्यक्ति पुलिस से मिलने और जांच में सहयोग करने को तैयार नहीं हैं। विश्वास अरिंदम पाल सहित इन तीनों पर ही नौकरी से निकलवाने की साजिश रचने का आरोप लगा रहा है।
पुलिस को सीसीटीवी कैमरों की कमी खली
क्राइम ब्रांच प्रभारी विमल कुमार ने बताया कि टाटा स्टील एंड लॉजिस्टिक्स कंपनी में सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, कंपनी में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए, चार माह पूर्व निकाला गया कर्मचारी बिना किसी रोकटोक के हथियार लेकर प्रबंधक तक पहुंच गया और वारदात को अंजाम दे आराम से फरार भी हो गया। यदि कंपनी में सीसीटीवी कैमरे लगे होते तो वारदात की फुटेज मिलती जो जांच में अहम कड़ी साबित होती।