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कांत एन्क्लेव : मुख्यमंत्री से बैठक का नहीं मिला समय
Updated Mon, 17 Sep 2018 11:34 PM IST
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कांत एन्क्लेव : मुख्यमंत्री से बैठक का नहीं मिला समय
- कर्नल बीबी शरण ने बैठक के लिए सोमवार को मांगा था समय
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। कांत एंक्लेव को उजड़ने से बचाने के प्रयास में जुटे यहां के निवासियों को मुख्यमंत्री मनोहरलाल से मिलने का समय नहीं मिल सका। एंक्लेव के निवासी कर्नल बीबी शरण ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सोमवार को मिलने का समय मांगा था। शरण के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय से बैठक का समय नहीं मिला। वह मुख्यमंत्री को कांत एंक्लेव मामले में सरकार के अधिसूचना और पीएलपीए लागू करने में खामियों से अवगत करा इसे सुधरवाने की मांग करेंगे।
कर्नल बीबी शरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कांत एंक्लेव को गिराने का निर्णय गलत तथ्यों पर लिया है। उनके मुताबिक हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने 19 दिसंबर 1963 को अधिसूचना जारी कर फरीदाबाद के योजनाबद्ध विकास के लिए कंट्रोल्ड एरिया की घोषणा की थी। इस पर 19 जनवरी 1966 को फरीदाबाद का पहला डेवलपमेंट प्लान घोषित किया गया। यही प्लान 1974 में रिवाइज किया गया। इस ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान में अनंगपुर गांव धौज, फरीदाबाद और बल्लभगढ़ आदि को शहरीकरण में शामिल किया जाना घोषित किया था। इसके लिए सरकार से सभी विभागों को पत्र लिखकर आपत्तियां मांगी गई थीं। वन विभाग सहित किसी भी विभाग ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। फरीदाबाद-बल्लभगढ़ संयुक्त प्रशासन का फाइनल डेवलपमेंट प्लान 1991 में घोषित किया गया।
18 अगस्त 1992 को वन विभाग ने फरीदाबाद-बल्लभगढ़ संयुक्त प्रशासन के बड़े क्षेत्रफल को पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट (पीएलपीए) 1990 के तहत शामिल किए जाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि वन विभाग ने 1991 से पहले कोई आपत्ति नहीं की थी। वह दावा करते हैं कि इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927 में भी गांव अनंगपुर, लक्कड़पुर और मेवला महाराजपुर को वन या संरक्षित वन होने का उल्लेख नहीं किया गया है। हरियाणा सरकार ने भी इस क्षेत्र को कभी वन क्षेत्र नहीं माना। यह क्षेत्र फरीदाबाद-बल्लभगढ़ संयुक्त प्रशासन के मास्टर प्लान में शामिल रहा है। नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड एक्ट 1985 में भी फरीदाबाद के मास्टर प्लान को मान्यता दी। सरकार के प्रधान सचिव ने भी कहा कि अधिसूचना में गलती से अनंगपुर गांव की जमीन शामिल की गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलकर बहुत सारे तथ्य उनके सामने रख कर इस एरिया को विमुक्त (डिनोटिफाई) कराने की मांग की जाएगी ताकि देश की सेवा करने वाले सैनिकों का आशियाना न उजड़े।
- कर्नल बीबी शरण ने बैठक के लिए सोमवार को मांगा था समय
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। कांत एंक्लेव को उजड़ने से बचाने के प्रयास में जुटे यहां के निवासियों को मुख्यमंत्री मनोहरलाल से मिलने का समय नहीं मिल सका। एंक्लेव के निवासी कर्नल बीबी शरण ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सोमवार को मिलने का समय मांगा था। शरण के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय से बैठक का समय नहीं मिला। वह मुख्यमंत्री को कांत एंक्लेव मामले में सरकार के अधिसूचना और पीएलपीए लागू करने में खामियों से अवगत करा इसे सुधरवाने की मांग करेंगे।
कर्नल बीबी शरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कांत एंक्लेव को गिराने का निर्णय गलत तथ्यों पर लिया है। उनके मुताबिक हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने 19 दिसंबर 1963 को अधिसूचना जारी कर फरीदाबाद के योजनाबद्ध विकास के लिए कंट्रोल्ड एरिया की घोषणा की थी। इस पर 19 जनवरी 1966 को फरीदाबाद का पहला डेवलपमेंट प्लान घोषित किया गया। यही प्लान 1974 में रिवाइज किया गया। इस ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान में अनंगपुर गांव धौज, फरीदाबाद और बल्लभगढ़ आदि को शहरीकरण में शामिल किया जाना घोषित किया था। इसके लिए सरकार से सभी विभागों को पत्र लिखकर आपत्तियां मांगी गई थीं। वन विभाग सहित किसी भी विभाग ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। फरीदाबाद-बल्लभगढ़ संयुक्त प्रशासन का फाइनल डेवलपमेंट प्लान 1991 में घोषित किया गया।
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18 अगस्त 1992 को वन विभाग ने फरीदाबाद-बल्लभगढ़ संयुक्त प्रशासन के बड़े क्षेत्रफल को पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट (पीएलपीए) 1990 के तहत शामिल किए जाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि वन विभाग ने 1991 से पहले कोई आपत्ति नहीं की थी। वह दावा करते हैं कि इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927 में भी गांव अनंगपुर, लक्कड़पुर और मेवला महाराजपुर को वन या संरक्षित वन होने का उल्लेख नहीं किया गया है। हरियाणा सरकार ने भी इस क्षेत्र को कभी वन क्षेत्र नहीं माना। यह क्षेत्र फरीदाबाद-बल्लभगढ़ संयुक्त प्रशासन के मास्टर प्लान में शामिल रहा है। नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड एक्ट 1985 में भी फरीदाबाद के मास्टर प्लान को मान्यता दी। सरकार के प्रधान सचिव ने भी कहा कि अधिसूचना में गलती से अनंगपुर गांव की जमीन शामिल की गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलकर बहुत सारे तथ्य उनके सामने रख कर इस एरिया को विमुक्त (डिनोटिफाई) कराने की मांग की जाएगी ताकि देश की सेवा करने वाले सैनिकों का आशियाना न उजड़े।
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