गर्मी का सितम: फरीदाबाद में सूरज की तपिश ने लोगों को किया बेहाल, बढ़ता तापमान झुलसाने लगा तन, विशेषज्ञों ने जताया ये अनुमान
फरीदाबाद में बुधवार को तेज धूप ने लोगों को बेहाल कर दिया।अधिकतम तापमान 42.3 और न्यूनतम 23.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इंसानों के साथ ही पशु-पक्षी बढ़े तापमान के बीच छांव तलाशते नजर आए। वहीं बढ़ती गर्मी के साथ अस्पतालों में भी मरीज बढ़ने लगे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तपती धूप के साथ लू के थपेड़ों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। बुधवार को गर्मी से बचने के लिए लोग तरह-तरह के प्रयास करते नजर आए। वहीं अधिकतम तापमान 42.3 और न्यूनतम 23.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अब अस्पतालों में डायरिया के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। चिकित्सकों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
बुधवार को सूरज निकलने के साथ गर्मी ने अपने सख्त तेवर दिखाने शुरू कर दिए। दोपहर तक तापमान 42.3 डिग्री पहुंच गया। ऐसे में नौकरी पेशा लोग धूप से बचते नजर आए। शीतल पेय पदार्थों की दुकानों पर दिनभर लोगों की भीड़ रही। वहीं स्कूली बच्चों ने छतरी का सहारा लिया। इस दौरान 2 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चली हवाएं लू में तब्दील हो गईं। इससे शहर की सड़कें सूनी हो गईं। पार्कों में लोग कम नजर आएं।
शाम छह बजे के बाद ही पार्क में रौनक लौटनी शुरू हुई। गर्मी के मौसम में सेक्टर-21 स्थित स्मार्ट पार्क में कुछ चहलकदमी देखने को मिली। मौसम वैज्ञानिक महेश पहलावत ने कहा कि लू चलती रहेगी। एक सप्ताह तक मौसम में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसके बाद पश्चिमी सक्रियता बढ़ने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़
गर्मी के कारण अस्पतालों में डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। एनआईटी-3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सामान्य ओपीडी 150 से बढ़कर 220 पहुंच गईं। निजी अस्पतालों में भी मरीजों की भीड़ देखने को मिल रही है। इनमें उल्टी, दस्त, बुखार रोगी ज्यादा शामिल हैं। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. प्रवीन मलिक ने गर्मी में बीमारियों से बचने के लिए लोगों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी है। इन दिनों भीषण गर्मी हैं। ऐसे में लू लगने की संभावना बनी रहती है। मरीजों को चाहिए कि वह तरल पदार्थों व ठंडी चीजों का सेवन करें।