श्रद्धा पर भारी पड़ रहा है पीड़ितों का मातम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड की त्रासदी लोगों के जेहन से अभी तक निकली नहीं है। 16 जून 2013 का भयानक मंजर सोच कर आज भी लोग सिहर उठते हैं। इस कारण इस बार चार धाम की यात्रा को लेकर फरीदाबाद के लोगों में किसी तरह का उत्साह नहीं है।
श्रद्धा पर पीड़ित परिवारों का मातम भारी पड़ रहा है। चार धाम की यात्रा शुरू होने में अब चंद दिन ही बचे हैं। दो मई को सबसे पहले गंगोत्री मंदिर के कपाट खुलने जा रहे हैं।
लेकिन इस बार अभी तक लोगों ने चार धाम की यात्रा को लेकर कोई तैयारी नहीं की है। इसका कारण पिछले वर्ष चार धाम की यात्रा पर केवल एनआईटी क्षेत्र से 150 लोग गए थे। इनमें से 31 लोग त्रासदी में खो गए।
वो मंजर नहीं भूलता
डबुआ कॉलोनी निवासी राम जुनेजा का कहना है कि पिछले वर्ष यात्रा को लेकर लोगों में गजब का उत्साह था। यात्रा के लिए दो बसें भी बुक करवाई थीं, चार धाम की यात्रा पर गए थे। लेकिन त्रासदी के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल छा गया। लोग अभी तक गम से उबर नहीं पाए हैं।
कॉलोनी के केपी सिंह भी वापस नहीं आए। उनके बच्चों के मन में अभी भी पिता को खोने का गम है, इसलिए कॉलोनी से मुश्किल ही है कि कोई व्यक्ति चार धाम की यात्रा पर जाएगा।
भूरा हलवाई ने बताया कि अपने तीन साथियों के साथ यात्रा पर गए थे, हालांकि इस त्रासदी में किसी अपने को तो नहीं खोया, लेकिन पांच दिन तक वहां पर अवश्य ही फंसा रहा। वो मंजर भूल नहीं पाता।
ट्रैवल एजेंसी का धंधा है मंदा
ट्रैवल एजेंसियों पर भी चार धाम की यात्रा को लेकर कोई बुकिंग नहीं हो रही है। सूरजकुंड के दयालबाग स्थित ट्रैवल एजेंसी मालिक गिरिश का कहना है कि इस वर्ष यात्रा को लेकर उनके पास अभी तक कोई बुकिंग नहीं आई है, जबकि पिछले वर्ष उनकी दो बसें 15 दिन पहले ही बुक हो चुकी थीं।
सेक्टर-16 स्थित ट्रैवल एजेंसी मालिक पंकज शर्मा ने बताया कि पिछले बार की घटना को लेकर बुकिंग न होने की उम्मीद पहले से लगाई जा रही थी, लेकिन अभी भी बुकिंग की आस नहीं छोड़ी है।
नीलम-बाटा रोड पर ट्रेवल एजेंसी चलाने वाले दुष्यंत बताते हैं कि मई माह में बुकिंग आ सकती है। अभी कोई बुकिंग नहीं हुई है।