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Delhi NCR News: जांच में मिला फर्जी लाइसेंस, अब चालक और वाहन मालिक देंगे 2 लाख मुआवजा
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साकेत कोर्ट ने एनडीएमसी कर्मचारी को 2.04 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
साकेत स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने सड़क हादसे में घायल एनडीएमसी कर्मचारी को 2,04,685 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि हादसे के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। जांच में उसका लाइसेंस फर्जी मिला। इसके कारण अदालत ने बीमा कंपनी को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया। अदालत ने चालक और वाहन मालिक को मिलकर मुआवजा देने का आदेश दिया है। मुआवजा राशि पर 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। पीठासीन अधिकारी अदिति गर्ग ने यह फैसला सुनाया।
दरवाजा खोलने से हुआ हादसा : मामला 22 जनवरी 2024 का है। एनडीएमसी में बेलदार ब्रिज किशोर मोटरसाइकिल से आईएनए की ओर जा रहे थे। गोविंदपुरी रेड लाइट के पास सड़क किनारे एक टाटा ऐस खड़ा था। आरोप के मुताबिक, चालक ने बिना संकेत दिए अचानक वाहन का दरवाजा खोल दिया। ब्रिज किशोर की बाइक दरवाजे से टकरा गई। वह सड़क की दूसरी तरफ जा गिरे और डीटीसी बस से टकरा गए। हादसे में उनके दोनों पैरों में चोट आई। अदालत ने कहा कि वाहन मालिक यह साबित नहीं कर सका कि उसने चालक के लाइसेंस की सही तरीके से जांच कराई थी। केवल लाइसेंस देखकर चालक को काम पर रखना पर्याप्त नहीं है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
साकेत स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने सड़क हादसे में घायल एनडीएमसी कर्मचारी को 2,04,685 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि हादसे के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। जांच में उसका लाइसेंस फर्जी मिला। इसके कारण अदालत ने बीमा कंपनी को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया। अदालत ने चालक और वाहन मालिक को मिलकर मुआवजा देने का आदेश दिया है। मुआवजा राशि पर 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। पीठासीन अधिकारी अदिति गर्ग ने यह फैसला सुनाया।
दरवाजा खोलने से हुआ हादसा : मामला 22 जनवरी 2024 का है। एनडीएमसी में बेलदार ब्रिज किशोर मोटरसाइकिल से आईएनए की ओर जा रहे थे। गोविंदपुरी रेड लाइट के पास सड़क किनारे एक टाटा ऐस खड़ा था। आरोप के मुताबिक, चालक ने बिना संकेत दिए अचानक वाहन का दरवाजा खोल दिया। ब्रिज किशोर की बाइक दरवाजे से टकरा गई। वह सड़क की दूसरी तरफ जा गिरे और डीटीसी बस से टकरा गए। हादसे में उनके दोनों पैरों में चोट आई। अदालत ने कहा कि वाहन मालिक यह साबित नहीं कर सका कि उसने चालक के लाइसेंस की सही तरीके से जांच कराई थी। केवल लाइसेंस देखकर चालक को काम पर रखना पर्याप्त नहीं है।
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