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दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, सॉफ्टवेयर सर्विस के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले 14 गिरफ्तार
Fri, 29 Mar 2019 04:07 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 29 Mar 2019 04:07 AM IST
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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सॉफ्टवेयर सर्विस के नाम पर अमेरिका और कनाडा के लोगों के साथ भारत में बैठकर ठगी करने का बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की साइबर क्राइम यूनिट ने फर्जी कॉलसेंटर का पर्दाफाश किया है। दिल्ली के कीर्ति नगर में चल रहे इस कॉलसेंटर से पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में ज्यादातर मध्यवर्गीय परिवार से हैं, जो कम समय में ज्यादा रकम कमाने के लालच में इस अपराध में लिप्त हुए। पुलिस ने कॉलसेंटर से 259 कंप्यूटर बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आकाश, शाहबाज, परविंदर सिंह, अभिषेक, अविनाश, दीपक पाल, गौरव कुदिया, मिथुन, नवनीत शर्मा, बिश्वजीत स्वैन, अंकुर धिरता, रंजीत सिंह, राजकुमार और राजकुमार लाल के रूप में हुई है।
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दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ दिन पहले एक अमेरिकी नागरिक ने फर्जी कॉलसेंटर के बारे में जानकारी देते हुए ठगी की शिकायत दी थी। साइबर क्राइम यूनिट तत्काल हरकत में आ गई। एसीपी आदित्य गौतम की निगरानी में एक टीम बनाई गई, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर सज्जन सिंह ने किया।
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पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में ज्यादातर मध्यवर्गीय परिवार से हैं, जो कम समय में ज्यादा रकम कमाने के लालच में इस अपराध में लिप्त हुए। पुलिस ने कॉलसेंटर से 259 कंप्यूटर बरामद किए हैं।
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पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आकाश, शाहबाज, परविंदर सिंह, अभिषेक, अविनाश, दीपक पाल, गौरव कुदिया, मिथुन, नवनीत शर्मा, बिश्वजीत स्वैन, अंकुर धिरता, रंजीत सिंह, राजकुमार और राजकुमार लाल के रूप में हुई है।
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दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ दिन पहले एक अमेरिकी नागरिक ने फर्जी कॉलसेंटर के बारे में जानकारी देते हुए ठगी की शिकायत दी थी। साइबर क्राइम यूनिट तत्काल हरकत में आ गई। एसीपी आदित्य गौतम की निगरानी में एक टीम बनाई गई, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर सज्जन सिंह ने किया।
फर्जी कॉल सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
26 और 27 मार्च को कीर्ति नगर में पड़ताल के बाद पुलिस आखिर में कॉलसेंटर तक पहुंची और वहां काम कर रहे युवाओं को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, इन सभी युवाओं ने अपना करियर टेली कॉलर (बीपीओ) के रूप में किया था, लेकिन ज्यादा रकम कमाने के चक्कर में उनकी एक टीम बनी और फर्जी कॉल सेंटर शुरू किया गया।
कॉल सेंटर के लिए इनका टारगेट युवा रहते थे, जिनकी उम्र 19 से 24 साल के बीच हो। इंटरनेट पर इन्होंने कॉल सेंटर का फोन नंबर भी सबसे ऊपर रखा था ताकि कोई भी सर्च करे तो सबसे पहले इनसे संपर्क हो सके। इस तरह इनकी ठगी का धंधा शुरू हुआ।
अमेरिका और कनाडा में बैठे लोग जब सॉफ्टवेयर से जुड़ी परेशानी को लेकर इनसे संपर्क करते, तो ये इधर उधर की बातें करते और सर्विस के नाम पर 400 से 800 डॉलर तक की फीस वसूल कर लेते। उस सर्विस के बाद भी परेशानी दूर नहीं होती थी। पूछताछ में पता चला है कि अब तक करीब 1 हजार से ज्यादा लोगों को ये निशाना बना चुके हैं।
कॉल सेंटर के लिए इनका टारगेट युवा रहते थे, जिनकी उम्र 19 से 24 साल के बीच हो। इंटरनेट पर इन्होंने कॉल सेंटर का फोन नंबर भी सबसे ऊपर रखा था ताकि कोई भी सर्च करे तो सबसे पहले इनसे संपर्क हो सके। इस तरह इनकी ठगी का धंधा शुरू हुआ।
अमेरिका और कनाडा में बैठे लोग जब सॉफ्टवेयर से जुड़ी परेशानी को लेकर इनसे संपर्क करते, तो ये इधर उधर की बातें करते और सर्विस के नाम पर 400 से 800 डॉलर तक की फीस वसूल कर लेते। उस सर्विस के बाद भी परेशानी दूर नहीं होती थी। पूछताछ में पता चला है कि अब तक करीब 1 हजार से ज्यादा लोगों को ये निशाना बना चुके हैं।
साइबर अटैक होने की झूठी जानकारी देते थे
पुलिस की पूछताछ में ये भी सामने आया है कि सॉफ्टवेयर सर्विस के अलावा ये लोग अमेरिका और कनाडा के लोगों को फोन करके उनके आईफोन पर साइबर अटैक होने की झूठी जानकारी देते थे।
कई बार हैकर्स का नाम लेकर भी ये उन्हें डराते और सैकड़ों यूएस डॉलर की कीमत वाले गूगल प्ले गिफ्ट कार्ड की खरीदारी कराकर ठगी करते थे। इनका कहना था कि गूगल प्ले गिफ्ट कार्ड लेने के बाद हैकर्स ब्लॉक हो जाएंगे।
इतना ही नहीं कॉल सेंटर प्रति कॉल 8 से 10 यूएस डॉलर की फीस भी लेता था। फोन पर ये उन लोगों को 6 से 8 घंटे तक बातों में उलझाकर रखते थे।
इस दौरान बातों में ये एहसास कराने का प्रयास करते कि ग्राहक की समस्या को निपटाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन आखिर में सफल न होने का हवाला देकर फोन रख देते। साथ ही ग्राहक का नंबर भी ब्लॉक कर देते थे।
कई बार हैकर्स का नाम लेकर भी ये उन्हें डराते और सैकड़ों यूएस डॉलर की कीमत वाले गूगल प्ले गिफ्ट कार्ड की खरीदारी कराकर ठगी करते थे। इनका कहना था कि गूगल प्ले गिफ्ट कार्ड लेने के बाद हैकर्स ब्लॉक हो जाएंगे।
इतना ही नहीं कॉल सेंटर प्रति कॉल 8 से 10 यूएस डॉलर की फीस भी लेता था। फोन पर ये उन लोगों को 6 से 8 घंटे तक बातों में उलझाकर रखते थे।
इस दौरान बातों में ये एहसास कराने का प्रयास करते कि ग्राहक की समस्या को निपटाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन आखिर में सफल न होने का हवाला देकर फोन रख देते। साथ ही ग्राहक का नंबर भी ब्लॉक कर देते थे।