फेसबुक पर आएगी 'वीरों की गाथा'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फरीदाबाद के सबसे बड़े गांव तिगांव के जांबाजों की दास्तान अब फेसबुक पर पूरी दुनिया देख सकेगी। यहां के कुछ युवाओं ने मिलकर गांव के उन लोगों के संघर्ष की कहानियों को साइबर दुनिया के माध्यम से लोगों के सामने लाने की कोशिश शुरू की है, जिन्होंने किसी न किसी युद्ध में शिरकत की है।
इसके लिए ‘वीरों का गांव तिगांव’ नाम से फेसबुक पर एक पेज बनाया है। जिसमें इस समय कई लोगों की जीवनगाथा को जगह मिल चुकी है।
देश के जो सिपाही अभी हमारे बीच हैं उनकी बातचीत भी इस पेज पर डाली गई है। सबके शौर्य का पूरा विवरण है। मसलन वे कब पैदा हुए। कहां-कहां लड़े और क्या खास काम किया।
'अमर उजाला' की खबर ने दिया नया 'जोश'
प्रथम विश्व युद्ध के बारे में जब सोमवार को ‘अमर उजाला’ ने खबर प्रकाशित की तो सैनिकों के लिए काम करने वाले इन युवाओं को हौसला मिल गया।
उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में शिरकत करने वाले सपूतों के परिवारों को खोजने का फैसला लिया है। ताकि उनकी बेहतरी के लिए शासन-प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।
इन युवाओं ने वीरों का गांव तिगांव के नाम से एक किताब भी निकाली है। इसका स्टीकर बनवाकर कारों पर लगवाना शुरू किया है ताकि नई पीढ़ी को यह गर्व हो कि वे किस माटी से हैं।
इसे लेकर आंदोलन चला रहे विजय नागर कहते हैं कि उनकी चाहत है कि तिगांव राजनीति नहीं बल्कि अपनी वीरगाथा के लिए हर जगह जाना जाए। उन्होंने बताया कि इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए संकेत चंदीला, विशाल नागर, अजय नागर एवं मयंक गांधी आदि युवा जुटे हुए हैं।
कई बहादुरों के नाम भी दिए फेसबुक पर
जो रिकार्ड फेसबुक पर डाला गया है उसके मुताबिक तिगांव के इतने लोग फौज में हुआ करते थे कि यहां किसी जमाने में मासिक भर्ती भी हुआ करती थी।
इस पेज पर सूबेदार मेजर लालाराम, रिसालदार रामपाल सिंह, चौधरी अंतराम, सूबेदार इंद्राज सिंह, कैप्टन जगदीश चंद्र, सूबेदार दलेल सिंह, सूबेदार मेजर तेजपाल सिंह, सूबेदार सुक्कन सिंह एवं सूबेदार सुखनलाल आदि का विवरण दिया गया है।
पेज पर यह भी बताया गया है कि वीर सुगनी सूबेदार, मांराज नाई, चेती अधाना और रिसाल अधाना आजाद हिंद फौज का हिस्सा रहे।
ये है पेज----> तिगांव