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उपहार अग्निकांड के चश्मदीद बोले- 22 साल बाद भी सिस्टम राम भरोसे, अब भी जिंदगियां दांव पर
Thu, 12 Dec 2019 12:45 AM IST
Vikas Kumar
अरुण कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
अरुण कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 12 Dec 2019 12:45 AM IST
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उपहार सिनेमा
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली में अब तक सबसे ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले उपहार अग्निकांड को 22 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब भी सिस्टम में कोई सुधार नहीं आया है। पहले भी जिंदगियां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी थीं और आज भी दांव पर हैं। यह दिल्ली की आम जनता नहीं, बल्कि वे लोग बोल रहे हैं जो उपहार हादसे के चश्मदीद हैं।
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उपहार सिनेमा से कुछ ही दूरी पर 1970 से स्पेयर पार्ट की दुकान चला रहे केएस खुराना ने कहा कि उनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है। बचपन में उन्होंने उपहार सिनेमा में बहुत-सी फिल्में देखी थीं। 22 साल पहले 13 जून की शाम करीब 4:35 बजे उन्होंने उपहार सिनेमा में आग का जो मंजर देखा था, उसे आज भी नहीं भूल पाते।
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सिनेमा में ‘बॉर्डर’ फिल्म का मैटिनी शो चल रहा था और भीड़ काफी ज्यादा थी। थियेटर में आग लगने के कारण भीतर फंसे लोग ऊपरी मंजिल से कूदकर जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। फिर भी 59 लोगों की जानें चली गई थीं। उन्होंने भी अपनी कार से थियेटर की बिल्डिंग से कूदने वाले तीन लोगों को अस्पताल पहुंचाया था। इनमें से एक की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसी घटनाओं से सबक लेना चाहिए और भ्रष्टाचार को खत्म करके हादसों की पुनरावृत्ति से बचना चाहिए। साथ ही, लोगों को भी नियमों का पालन करना चाहिए।
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सबसे बड़े हादसे के बाद भी नहीं सुधरा सिस्टम
चश्मदीद हरभजन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
65 वर्षीय हरभजन सिंह का कहना है कि उन्होंने इस हादसे से बड़ी आग की कोई घटना नहीं देखी। अब भी उन्हें उन लोगों के चेहरे याद आते हैं, जो थियेटर का दरवाजा बंद होने के कारण अंदर फंस गए थे और बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से से कूद रहे थे। उन्होंने कहा कि 22 साल बीत गए हैं और इस हादसे में मरने सवाले लोगों की स्मृति में थियेटर के सामने बने पार्क में उनके नामों की सूची लगाई गई है। हर साल यहां उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है, लेकिन हादसे से प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। आज भी सिस्टम राम भरोसे चल रहा है। वर्तमान में भी अनाज मंडी की घटना के दौरान प्रशासन ने जब तक बचाव किया, तब तक 43 लोगों की मौत हो चुकी थी। इस सिस्टम में बदलाव लाने की जरूरत है, क्योंकि अधिकारी सांठगांठ करके अवैध धंधों को बढ़ावा देते रहे तो ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।
हादसों से निपटने के इंतजाम करे सरकार
45 वर्षीय धर्मा ने बताया कि वे इस इलाके में करीब 25 साल से सफाई का काम करते हैं। उन्होंने भी उपहार में लगी आग का विकराल रूप देखा था। उन्हें नहीं लगता कि बीते 2 दशकों में सरकार ने आग की घटनाओं से निपटने के लिए बेहतर इंतजाम किए हैं। सरकार को अब अनाज मंडी में फैक्टरी में आग की घटना से सबक लेना चाहिए, ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हो सकें। हालांकि आग की घटनाएं कहीं भी हो सकती हैं, लेकिन सरकार को इससे निपटने के लिए बेहतर संसाधनों की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि संकरे इलाकों में भी लोगों को समय पर मदद पहुंचाई जा सके।
हादसों से निपटने के इंतजाम करे सरकार
45 वर्षीय धर्मा ने बताया कि वे इस इलाके में करीब 25 साल से सफाई का काम करते हैं। उन्होंने भी उपहार में लगी आग का विकराल रूप देखा था। उन्हें नहीं लगता कि बीते 2 दशकों में सरकार ने आग की घटनाओं से निपटने के लिए बेहतर इंतजाम किए हैं। सरकार को अब अनाज मंडी में फैक्टरी में आग की घटना से सबक लेना चाहिए, ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हो सकें। हालांकि आग की घटनाएं कहीं भी हो सकती हैं, लेकिन सरकार को इससे निपटने के लिए बेहतर संसाधनों की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि संकरे इलाकों में भी लोगों को समय पर मदद पहुंचाई जा सके।