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बजट से उद्यमियों की उम्मीद: युवाओं को प्रोत्साहन देने वाला बजट हो तो बेहतर
Mon, 31 Jan 2022 03:15 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Mon, 31 Jan 2022 03:15 PM IST
सार
उद्यमियों का मानना है कि लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए रॉ मेटेरियल सस्ते रेट पर मिले तो बने बात।
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बजट 2022
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोविड काल में तमाम वित्तीय उतार चढ़ाव के बीच एक बार फिर आम बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा। वित्तमंत्री के पिटारे से क्या निकलेगा इसपर सबकी नजर है। बजट को लेकर सबकी अपनी-अपनी उम्मीदें है। कोविड संक्रमण की वजह से जूझ रहे दिल्ली के उद्यमियों को बजट में राहत की आस है। उद्यमियों को जीएसटी की समस्या अभी भी परेशान कर रही है तो आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए रॉ मेटेरियल पर कस्टम ड्यूटी कम होने की उम्मीद है। पैतृक व्यवसाय में आने वाले युवाओं के लिए प्रोत्साहन पैकेज की दरकार है।
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क्या कहते हैं उद्यमी
कोविड महामारी के दौर में तमाम सेक्टर को सरकार से राहत की दरकार है। रॉ मेटेरियल पर कस्टम ड्यूटी कम होने की उम्मीद के साथ। फिनिश गुड्स पर कस्टम ड्यूटी अधिक होने से परेशानी है। प्रोपराइटर शिप और पार्टनर शिप फर्मो को मैन्युफैक्चरिंग आय आयकर मुक्त करने की उम्मीद बजट से है। उद्योग में जीएसटी देनदारी सेलर की बजाय खरीददार की होनी चाहिए। फिजिकल डॉक्युमेंट रखने की अनिवार्यता अधिकतम 2 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। पैतृक व्यवसाय में आने वाले युवाओं के लिए प्रोत्साहन पैकेज होना चाहिए। उद्यमियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए कोई योजना होनी चाहिए।
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मुकेश अग्रवाल, महामंत्री प्लास्टिक एंड एक्ससीरीज मैन्यूफैक्चरिंग वेलफेयर एसोसिएशन
इस बार बैलेंस बजट की उम्मीद सरकार से है। इंफ्रास्ट्रक्चर में बेहतर काम हुए है इसे और बेहतर करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार को भी अपनी नीति में बदलाव लाने की आवश्यकता है। आयात को रोकने होगा ताकि स्वावलंबी भारत का निर्माण हो सके। घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को सहयोग करना होगा। जूते पर जीएसटी पांच प्रतिशत पहले होता था। अब 12 प्रतिशत हो गया है। इस स्लैब को वापस पांच प्रतिशत करने की उम्मीद है। बाहर की कंपनियों को लुभाने के लिए 25 प्रतिशत का टैक्स है। जबकि लोकल के लिए 30 प्रतिशत। ये टैक्स स्लैब बराबर होना चाहिए। नगर पालिकाओं के कारण नियोजित धन का भुगतान केंद्र सरकार द्वारा सीधे उन्हें किया जाना चाहिए।
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वीरेंद्र नागपाल, दिल्ली यूनिट अध्यक्ष लघु उद्योग भारती
जीएसटी के नियम ठीक होने चाहिए। जीएसटी के रिटर्न के समय में बदलाव की आवश्यकता है। 13 दिन की जगह 20 दिन होना चाहिए। छोटे उद्योग को बढ़ावा देने के लिए रॉ मेटेरियल पर सब्सिडी मिलने की उम्मीद है। चीन से मुकाबला करना है तो सिर्फ आयात कर बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। बड़ी इंडस्ट्री को ही फायदा पहुंचाने की नीति बदलनी होगी। इससे छोटी इंडस्ट्री बर्बाद हो रही है। स्मॉल स्केल इंडस्ट्री के लिए इनकम टैक्स का रेट कम होना चाहिए। सिर्फ लोन बांटने तक ही सीमित रह गया प्रधानमंत्री की घोषणाएं। लोन उद्यमियों को बर्बादी के कगार पर ले जाता है। सब्सिडी का रास्ता ढूंढ़ने की जरूरत है।
रघुवंश अरोड़ा, अध्यक्ष एपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ एनसीडी
बजट विकास के लिए होना चाहिए। कमजोर स्मॉल स्केल इंडस्ट्री को समर्थन देना चाहिए। एमएसएमई क्षेत्र को तेजी से भुगतान करने के लिए एक विशिष्ट सेल प्रदान करके एमएसएमई क्षेत्र पर विशेष ध्यान देंने की आवश्यकता है। निर्णय लेने पर कठोर दंड के साथ अधिक प्रभावी और समयबद्ध निकायों का गठन किया जाना चाहिए। विलंबित कार्रवाई के लिए सरकारी अधिकारी भी जिम्मेदार होंगे। जहां तक जीएसटी की बात है तो यह अब जीएसटी परिषद के पूर्वावलोकन में है। बजट 2022 में व्यक्तिगत कर सुधारों पर ध्यान देना होगा। एमएसएमई पर कोई पूर्व भुगतान शुल्क लागू नहीं होना चाहिए।
अशोक गुप्ता, अध्यक्ष, कन्फेडरेशन ऑफ स्मॉल स्केल एंड माइक्रो इंडस्ट्री
जीएसटी की दरों में कमी व सरलीकरण किया जाए ताकि व्यापारी अपनी रिटर्न स्वयं भर सके। इनकम टैक्स प्रावधान को हटाया जाए। सभी राज्यों में भी व्यापार मंत्रालय होना चाहिए। बजट युवाओं के लिए होना चाहिए ताकि व्यापार मजबूत हो सके। रोजगार देने के लिए उद्यम को बढ़ावा देने की जरूरत है।
राकेश कुमार यादव, अध्यक्ष फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन