सुब्रह्मण्यम स्वामी बन सकते हैं जेएनयू के कुलपति
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प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, लेखक, प्रोफेसर, वकील व वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के नए कुलपति हो सकते हैं। जेएनयू में वर्तमान कुलपति प्रो. एसके सोपोरी का कार्यकाल जनवरी में समाप्त होने जा रहा है।
ऐसे में एमएचआरडी ने कुलपति के लिए स्वामी का नाम प्रस्तावित किया है। इस संबंध में स्मृति ईरानी ने दो दिन पहले स्वामी से कुलपति के रूप में पदभार संभालने के लिए बात भी की है।
सूत्रों के मुताबिक, जेएनयू को वामपंथी विचारधारा वाले संगठनों से दूर करके दक्षिणपंथी विचारधारा की एंट्री कराने की कोशिश माना जा रहा है। हालांकि, एमएचआरडी अभी स्वामी को मनाने में लगा है।
स्वामी चाहते हैं कोई उनके काम में दखल ना दे
स्वामी चाहते हैं कि कुलपति के रूप में सेवाएं देने के दौरान उन्हें ब्यूरोक्रेट लॉबी परेशान न करे, क्योंकि एमएचआरडी में छोटी-छोटी फाइलों के अप्रूवल के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति को अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, इसीलिए स्वामी चाहते हैं कि सरकार उन्हें राज्यसभा सांसद बनाने के साथ कैबिनेट रैंक का पद भी नवाजे, ताकि रुतबे में ब्यूरोक्रेट से ऊपर होने पर वे सीधे निर्देश दे सकें।
यह इच्छा उन्होंने केंद्र सरकार का सुझाव आने के बाद जता दी है। स्वामी को इस मामले में आरएसएस का भी साथ मिल चुका है। हालांकि, आखिरी फैसला दोनों शर्तों के आधार पर ही होगा।
एमएचआरडी के सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार स्वामी को कुलपति के रूप में जेएनयू को संभालने की जिम्मेदारी देना चाहती है, ताकि जिस विजन के साथ जेएनयू का निर्माण किया गया था, वह बना रहे।
इस वजह से ज्यादा है संभावना
विश्वविद्यालय धीरे-धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है। इसके अलावा विश्वविद्यालय बीए प्रोग्राम शुरू करना चाहता है लेकिन छात्रों व शिक्षकों के दबाव के चलते कोई योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। वहीं, फीस बढ़ोतरी न होने के चलते विश्वविद्यालय पर आर्थिक संकट भी गहराता जा रहा है।
स्वामी राजनीति के जानेमाने चेहरे साथ ही अच्छे अर्थशास्त्री व वकील भी हैं। उन्होंने 11 अगस्त, 13 को जनता पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर अपनी पार्टी को भाजपा में मिला दिया था। तमिलनाडु में 15 सितंबर 1939 में जन्म हुआ।
पिता की ट्रांसफर जॉब के चलते डीयू के हिंदू कालेज से बीएससी मैथ्मेटिक्स की डिग्री लेने के बाद इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूट से स्टेटिस्टिक्स से मॉस्टर डिग्री ली। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पीएचडी की। उन्होंने अर्थशास्त्र पर कई किताबें भी लिखी हैं। वकील के रूप में उन्होंने कई राजनैतिक हस्तियों को कठघरे में खड़ा किया है, जिसमें टू जी घोटाला मुख्य है।