दिल्ली में दो चुनावों ने खाली कर दिया खजाना
राजधानी में आबकारी विभाग को लगातार आए दो चुनाव के बाद भी घाटा झेलना पड़ा। विभाग रिवाइज टारगेट को भी पूरा नहीं कर सका।
एक दशक की बात करें तो आबकारी राजस्व 708 करोड़ रुपये से बढ़कर 3151 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
दिल्ली सरकार के खजाने में पैसे की भागीदारी बिक्री एवं कर विभाग व राजस्व विभाग के बाद आबकारी विभाग की होती है। एक दशक से सरकार ने विभाग को राजस्व प्राप्ति का जो लक्ष्य दिया, उसे न सिर्फ पूरा किया गया बल्कि अधिक कर जमा हुआ।
चुनाव में घट गई बिक्री
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अपने अंतिम बजट में आबकारी विभाग को 3500 करोड़ रुपये जमा करने का लक्ष्य दिया था। इस बीच चुनाव आ गए।
विभाग लक्ष्य से काफी दूर रह गया तो सरकार गिरते ही लक्ष्य घटाकर 3200 करोड़ कर दिया गया। विभाग को लक्ष्य पूरा करने के लिए कहा गया लेकिन वो पूरा नहीं कर सके और आंकड़ा 3151 करोड़ पर थम गया।
वित्त विभाग ने पूछताछ की तो यह तर्क सामने आया कि चुनावी साल में आबकारी टैक्स नहीं बढ़ाया गया। फिर चुनाव में बिक्री घट गई। सख्त मॉनिटरिंग से भी राजस्व घटा। वित्त वर्ष 2014-15 के लिए फिर से लक्ष्य 3500 करोड़ रुपये का रखा गया है।