ईडब्ल्यूएस को निशुल्क मिलेगी कोविड और नॉन कोविड सुविधा
- शिकायतों के बाद दिल्ली सरकार ने अस्पतालों को दिया आदेश
- नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर हो सकती है कार्रवाई
- दिल्ली सरकार ने कोविड और ईडब्ल्यूएस मरीजों से जुड़ी जानकारी तीन दिन में देने के निर्देश भी दिए हैं
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कोरोना वायरस को लेकर दिल्ली के 117 प्राइवेट अस्पताल या नर्सिंग होम में 20 फीसदी बिस्तरों को आरक्षित किया है। हालांकि, कई शिकायतों के बाद दिल्ली सरकार ने अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) मरीजों के लिए कोविड और नॉन कोविड दोनों ही सुविधाएं निशुल्क देने के आदेश दिए हैं।
इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि एक्शन कैंसर अस्पताल 100 बिस्तरों की क्षमता के साथ है तो वहां के 20 बिस्तर कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित हैं। इन 20 में से दो बिस्तर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के कोरोना संक्रमित मरीज के लिए आरक्षित हैं, जिनका उपचार निशुल्क किया जाएगा।
बाकी बचे 80 बिस्तरों पर नॉन कोविड मरीजों को भर्ती किया जा सकता है। इनमें से आठ बिस्तर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत आरक्षित हैं। दिल्ली सरकार ने आदेश में 56 अस्पतालों के नाम देते हुए स्पष्ट किया है कि उनके अस्पताल में कितने कोविड और नॉन कोविड बिस्तर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए होंगे।
दरअसल, दिल्ली सरकार से अधिग्रहीत भूमि पर अस्पताल बनाने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को निशुल्क उपचार देने का प्रावधान है। ओपीडी में कुल क्षमता का 25 फीसदी और आईपीडी में 10 फीसदी बिस्तर इन मरीजों को दिए जा सकते हैं।
हाल ही में सरकार ने आदेश दिया था कि जिन अस्पताल या नर्सिंग होम में 50 से ज्यादा बिस्तरों की क्षमता है वहां 20 फीसदी बिस्तरों को कोविड मरीजों के लिए आरक्षित किया जाएं। ऐसे अस्पताल या नर्सिंग होम की संख्या 117 है।
अब सरकार ने इन अस्पतालों में ईडब्ल्यूएस वर्ग को लेकर भी स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं, जिसका पालन न करने पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। दिल्ली सरकार ने कोविड और ईडब्ल्यूएस मरीजों से जुड़ी जानकारी को तीन दिन में देने के निर्देश भी दिए हैं।
कोविड बेड पर भर्ती नहीं किया जाएगा संदिग्ध मरीज
कोरोना वायरस को लेकर आरक्षित किए गए बिस्तरों पर संदिग्ध मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सकता है। कुछ अस्पतालों से जानकारी मिल रही है कि बिना लक्षण या वायरस का हल्का असर वाले मरीजों को भर्ती कर रखा है, जबकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नियम हैं कि गंभीर मरीजों को ही भर्ती किया जाए। ऐसे में संदिग्ध मरीजों को कोविड बिस्तर पर भर्ती नहीं किए जाने के आदेश दिल्ली सरकार ने दिए हैं। अस्पतालों को आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश देते हुए दिल्ली स्वास्थ्य सचिव ने लिखा है कि हल्का असर या बिना लक्षण वाले मरीज को होम आइसोलेशन में रखा जाए। अगर उनके घर में जगह नहीं है तो संबंधित मरीज को सरकार के कोविड निगरानी केंद्र में भेजा जा सकता है। इसके अलावा मरीज के भर्ती करने, जांच आदि की जानकारी समय पर देने के लिए भी कहा है। अस्पतालों की जिम्मेदारी है कि रोजाना संबंधित नोडल केंद्र में कोविड उपचार से जुड़ी सभी जानकारियां तय फॉर्मेट में जमा कराएं, ताकि सरकार को समय रहते जानकारी उपलब्ध हो सके।
अस्पताल में 15 मिनट में पूरी हो प्रक्रिया
स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए विभाग ने सभी अस्पतालों को एसओपी भेजी है। इसके तहत उन्हें बताया गया है कि कोविड मरीजों के लिए अस्पताल में अलग से रिसेप्शन की व्यवस्था होनी चाहिए। मरीज के अस्पताल पहुंचने से 15 मिनट के भीतर सभी प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। अगर अस्पताल में बिस्तर नहीं है तो मरीज की चिकित्सीय स्थिति को देखते हुए उसे अस्पताल, कोविड निगरानी केंद्र या कोविड स्वास्थ्य केंद्र भेजने की जवाबदेही अस्पताल की होगी। अस्पताल में अगर मरीज को यह लगता है कि उसका उपचार सही तरीके से नहीं हो रहा है या फिर भर्ती प्रक्रिया में देरी और मनाही होती है तो उसके लिए अस्पताल को 24 घंटे चलने वाली एक हेल्पलाइन शुरू करनी होगी, जिसके नंबर की जानकारी मरीज को भर्ती करते वक्त दी जाएगी, ताकि वह अपनी शिकायत को आसानी से दर्ज करा सके।
कोर्ट में सुनवाई से पहले मरीज की मौत
दिल्ली के अस्पताल में उपचार को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाली मरीज की सुनवाई से पहले ही मौत हो गई। शुक्रवार को कोर्ट में याचिका पर सुनवाई थी, लेकिन 3 जून को याचिका दायर करने के कुछ ही घंटे बाद मरीज की मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि 80 वर्षीय मरीज 25 मई को एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए थे। उन्हें बुखार के लक्षण थे। आरोप था कि अस्पताल में वह संक्रमित हो गए थे। इसके चलते 30 मई को उनकी कोरोना वायरस की जांच हुई और एक जून रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। याचिका में बताया गया कि मरीज की तबियत प्रतिदिन खराब हो रही थी।
अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर करने का दबाव बनाया जा रहा था। इसके चलते परिजनों ने दिल्ली एम्स, राजीव गांधी समेत कई अस्पतालों में संपर्क किया, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। इधर, निजी अस्पताल में भी हर दिन लाखों का बिल बन रहा था, जिसके चलते फ्री उपचार की मांग को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिका में अपील की गई कि दिल्ली सरकार ईडब्ल्यूएस योजना के तहत मरीज का निशुल्क उपचार उपलब्ध कराए। हालांकि, इस मामले में सुनवाई से दो दिन पहले ही मरीज की मौत हो गई।