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Delhi: दिल्ली-एनसीआर में हर दूसरा व्यक्ति दृष्टि दोष से पीड़ित, कोरोना महामारी के बाद डेढ़ गुना तक बढ़े मामले

Tue, 25 Jul 2023 12:09 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 25 Jul 2023 12:09 AM IST
सार

विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना महामारी के बाद दृष्टि दोष के मामले डेढ़ गुना तक बढ़े हैं। यह सबसे ज्यादा मामले छोटे बच्चों में देखने को मिल रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा दिक्कत स्क्रीन टाइम का बढ़ना है।
 

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Every second person in Delhi-NCR suffers from visual impairment
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में रहने वाला हर दूसरा व्यक्ति दृष्टि दोष से पीड़ित है। कोरोना महामारी के बाद इसमें डेढ़ गुना तक की वृद्धि हुई है। सबसे ज्यादा मामले छोटे बच्चों के बढ़े हैं। दरअसल एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र ने केंद्र सरकार के निर्देश पर दिल्ली-एनसीआर के शहरी मलिन बस्तियों में प्राथमिक नेत्र देखभाल सेवाएं देने के लिए 17 दृष्टि केंद्र स्थापित किए। 50 हजार की आबादी पर बनाए गए इन केंद्रों में उपचार करवाने आ रहे 100 मरीजों में से 40 में दृष्टि दोष के मामले पाए जा रहे हैं।

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यह मरीज चश्मे की जांच करवाने आ रहे हैं। वहीं जांच में 10 फीसदी मरीजों में सफेद मोतियाबिंद पाया जा रहा है। इसके अलावा अन्य समस्याएं भी मिल रही हैं।विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना महामारी के बाद दृष्टि दोष के मामले डेढ़ गुना तक बढ़े हैं। यह सबसे ज्यादा मामले छोटे बच्चों में देखने को मिल रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा दिक्कत स्क्रीन टाइम का बढ़ना है।

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डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ डॉक्टर प्रवीण वशिष्ठ ने बताया कि देश में अंधापन और दृश्य हानि गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याएं बन गई हैं। ऐसे में प्राथमिक नेत्र देखभाल उपचार को सुलभ और आसान बनाना होगा। इसके तहत एम्स ने दिल्ली-एनसीआर में 17 केंद्र बनाए हैं। इन केंद्रों में दृष्टि दोष सहित मोतियाबिंद व अन्य की जांच की जा रही है। यहां पर सही प्रशिक्षण और सही उपकरणों के साथ डायबिटिक रेटिनोपैथी और ग्लूकोमा का पता लगाने के लिए स्क्रीनिंग भी की जा रही है।

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हर साल 70 हजार से अधिक मरीजों का उपचार

डॉक्टरों ने बताया कि इन केंद्रों में हर साल 70 हजार से अधिक मरीजों का उपचार हो रहा है। पिछले पांच-छह साल से यह केंद्र चल रहे हैं। इन केंद्रों में कोरोना महामारी के बाद मरीजों की संख्या डेढ़ गुना तक बढ़ गया है।


5 हजार से अधिक बच्चे कम दृष्टि वाले मिल रहे

केंद्रों में हर साल 40 हजार से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग के दौरान पांच हजार से अधिक बच्चे सामान्य से कम दृष्टि वाले मिल रहे हैं और उन्हें मुफ्त चश्मे दिए जाते हैं।

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