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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Even after the list of 531 schools, there is uncertainty over refunds, parents demand immediate refunds.

Delhi NCR News: 531 स्कूलों की सूची के बाद भी रिफंड पर संशय, अभिभावकों की मांग जल्द दें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 May 2026 07:35 PM IST
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-दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र, मामले में हस्तक्षेप की मांग की
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-मामला 15 वर्षों से लंबित है और अब तक अनुमानित रिफंड देनदारी 1, 317 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली के निजी स्कूलों की ओर से कई सालों से वसूली जा रही अतिरिक्त फीस मामले ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन (डीपीए) ने इस मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह समिति की सिफारिशों को तत्काल लागू करने तथा अभिभावकों को उनका लंबित फीस रिफंड दिलाने की मांग की है। फीस रिफंड का मामला 15 वर्षों से लंबित है और रिफंड की देनदारी बढ़कर 1, 317 करोड़ से अधिक हो चुकी है।
डीपीए की ओर से इस संबंध में मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि 8 मई को इस मामले की दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है। ऐसे में उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि अदालत में अभिभावकों और बच्चों के हितों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। मालूम हो कि न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह समिति का गठन निजी स्कूलों द्वारा अतिरिक्त फीस वसूली की जांच के लिए किया गया था।
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2016 में लगभग 531 विद्यालयों की सूची सार्वजनिक हुई थी, लेकिन समिति का कार्य अप्रैल 2020 तक था, इस कारण से एसोसिएशन को आशंका है कि यह सूची अंतिम नहीं है। डीपीए ने कहा कि लगभग 230 स्कूलों ने समिति की रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी, जबकि करीब 300 स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने रिपोर्ट को चुनौती नहीं दी और संभवत: आज भी रिफंड के लिए उत्तरदायी हैं। एसोसिएशन के अनुसार कुछ स्कूल ऐसे हो सकते हैं जो न सार्वजनिक सूची में हैं और न ही कोर्ट चुनौती सूची में, जिससे पूरे मामले में गंभीर अस्पष्टता बनी हुई है। एसोसिएशन ने सरकार से अप्रैल 2020 तक समिति के अंतर्गत आए सभी स्कूलों की अंतिम सूची सार्वजनिक करने, स्कूल वार रिफंड और ब्याज देनदारी बताने, ऑनलाइन रिफंड क्लेम पोर्टल बनाने की मांग की है।
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