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यहां दशहरे से एक दिन बाद जलाया जाता है रावण, जानिए वजह
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Thu, 13 Oct 2016 12:38 AM IST
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रावण दहन
- फोटो : अमर उजाला
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जेवर तहसील में दयौरार एक ऐसा गांव हैं, जिसमें रावण का पुतला दशहरे के एक दिन बाद जलाया जाता है। यहां की रामलीला कमेटी के प्रतिनिधियों का कहना है कि विजयदशमी के दिन बुराई के प्रतीक रावण को मार दिया गया था, मगर उसे अगले दिन जलाया गया था।
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इस वजह से यहां दशहरा के अगले दिन जलाया जाता है। गांव में दशहरे के दिन भगवान राम की विजय का जश्न मनाया जाता है। इस वर्ष भी दशहरे के एक दिन बाद बुधवार को भी दयौरार में रावण का पुतला दहन किया गया।
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बुधवार सुबह से ही गांव में तैयारियां शुरू हो गई। दोपहर में राम रावण युद्ध, मां काली की विशाल झांकी, रानी लक्ष्मीबाई की झांकी के साथ अनेक सुंदर सुंदर झांकियां निकाली गई।
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मां काली की शोभा यात्रा प्राथमिक स्कूल के समीप बने रामलीला मैदान से शुरू होकर गांव के मुख्य तिराहे से होती पूरे गांव की परिक्रमा के बाद प्राथमिक स्कूल के मैदान में रावण के पुतले के सामने आकर समाप्त हुई।
जहां भगवान राम ने शाम पांच बजे बुराई के प्रतीक रावण के पुतले में अग्नि बाण चलाकर जला दिया। गांव में लगे मेले व पुतला दहन के लिए आसपास के गांव थोरा, भवोकरा, मोहवलीपुर, हिमायूं पुर, चांचली, कलाखरी, मौर से बड़ी संख्या में भीड़ एकत्रित हुई, जिसे देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी सुबह से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।
थोरा चौकी के अलावा जहांगीरपुर व नीमका चौकी की पुलिस को मेले की सुरक्षा मे लगाया गया था। इस मौके पर श्रीराम शर्मा, यशपाल सिहं धीरज शर्मा, कुशलपाल सिंह, दिनेश शर्मा, दुष्यंत सिंह केशव सिंह छौंकर, दीपक शर्मा, सुभाष सिंह, जगवीर सिंह, नेपाल सिंह, ओमवीर सिंह, जयदेव सिंह आदि लोग मौजूद रहे।