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बुक पढ़ना छोड़ बुकी बन रहे हैं इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स

Thu, 17 Apr 2014 11:16 PM IST
Updated Thu, 17 Apr 2014 11:16 PM IST
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engineering students becomes bookie for quick money

जवाहर लाल नेहरु राजकीय कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एसपी सिंह का कहना है कि कुकुरमुत्तों की तरह उग रहे इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता का घोर अभाव है।

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बच्चों को सही मार्गदर्शन न मिलने और गुणवत्ता युक्त शिक्षा के अभाव में रोजगार नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि मजबूरी में वह जुर्म की ओर जा रहे हैं, जरुरत है उन्हें समय पर उचित मार्गदर्शन देने की।
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सीआईए बड़खल इंचार्ज विमल कुमार का कहना है कि बेरोजगारी में शौक पूरा न होने के कारण ही छात्र कम समय में बड़ा आदमी बनने की चाहत जुर्म का रास्ता अपना रहे है।

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नौकरी नहीं मिली तो बन गए बुकी

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साल दर साल लाखों रुपये फीस देकर इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले छात्रों को रोजगार के लाले पड़ रहे हैं। नौकरी के अभाव में उनके कदम अब जुर्म की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे छात्र यहां अब बुकी बन कर आईपीएल और वर्ल्ड कप के मैचों में लाखों रुपये का सट्टा लगावा रहे है। अमर उजाला ने ऐसे कई छात्रों को ढूंढ निकाला जो अब बुकी का काम करने में लगे हैं।

छात्रों ने पहचान छुपाने की शर्त पर अपनी मजबूरी की कहानी अमर उजाला को बताई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में 12वीं कक्षा पास करने के बाद चारों दोस्त अलग-अलग इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में दाखिला लेकर पढ़ाई शुरू की। निजी कॉलेज होने के कारण लाखों रुपये फीस जमा किया।

चार साल बाद 2010 में जब डिग्री हाथ में मिली तो छात्रों ने नौकरी के लिए कई जगह आवेदन किया और इंटरव्यू दिए। करीब एक साल बीत जाने के बाद भी चार दोस्तों को रोजगार नसीब नहीं हुई। आर्थिक तंगी से परेशान होकर उन्होंने 2012 में किक्रेट में सट्टा लगवा रहे अपने दोस्त से मिले और बुकी बनने के गुर सीखे।

2500 रुपये में शुरू किया था यह 'गंदा धंधा'

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छात्रों ने 2500 रुपये महीने में सट्टे की लाइन का कनेक्शन लिया और बुकी बन कर काम शुरू कर दिया। उन्होंने मैच के दौरान अपने अलग-अलग काम भी बांट लिए।

तीन दोस्त मिल कर फोन पर पैसे लगवाते और बीकॉम कर चुका चौथा दोस्त अपने लैपटॉप में उन सबकी एंट्री कर लेखा जोखा रखता है। पहला आईपीएल का सीजन खत्म होने के बाद छात्रों ने दो महीने में सारा खर्च निकाल कर दो-दो लाख रुपये कमा लिए।

एक साथ इतनी रकम हाथ लगने के बाद तो उनका यह सिलसिला चल पड़ा। एक साल तक क्रिकेट मैचों में सट्टा लगाने के बाद उन्होंने अब हर खेल पर जैसे फुटबाल, हॉकी मैच पर भी सट्टा लगवाना शुरू कर दिया है।

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