दिल्ली के स्टार्ट अप पॉलिसी में रहेगा टेक्नोलोजी पर जोर, दलित-अल्पसंख्यक युवाओं को उद्यमी बनाने पर होगा फोकस
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजधानी के लिए अपनी स्टार्ट अप पॉलिसी लाने की घोषणा की है। इस स्टार्ट अप पॉलिसी में दिल्ली सरकार के कॉलेजों से पास होने वाले तकनीकी क्षेत्र के युवाओं को विशेष मौका मिलेगा। स्टार्ट अप पॉलिसी में सामाजिक संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा और इसमें दलित-अल्पसंख्यक युवाओं को स्वरोजगार विकसित करने के लिए विशेष मौका दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें आर्थिक संसाधन मुहैया कराने के साथ-साथ तकनीकी सहयोग भी दिया जाएगा। पॉलिसी के लिए विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से तकनीकी सहयोग और राय ली जा रही है और जल्दी ही इसे जनता के सामने पेश कर दिया जाएगा।
नई स्टार्ट अप पॉलिसी की फ्रेमिंग से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक अरविंद केजरीवाल लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि युवाओं को नौकरी खोजने वाले की जगह नौकरी देने वाला बनने की सोच रखनी चाहिए। इसे ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार के स्कूलों में वोकेशनल कोर्सेज को बढ़ावा दिया गया था। अब नई स्टार्ट अप पॉलिसी उसी योजना का अगला और महत्त्वपूर्ण चरण है जिसमें सरकार कॉलेजों से निकलने वाले युवाओं को अपना रोजगार विकसित करने के लिए आर्थिक और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराएगी।
टैक्स से छूट, लालफीताशाही से मुक्ति
सरकार नई स्टार्ट अप पॉलिसी में तीन से पांच वर्षों तक के लिए टैक्स पूरी तरह से माफ कर सकती है, यानी उन्हें लाभ की स्थिति में आने तक प्रदेश सरकार को किसी तरह का टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा। स्वयं एक अफसर रह चुके केजरीवाल को लालफीताशाही से उद्योगपतियों को होने वाली परेशानी का बखूबी अंदाजा है, यही कारण है कि सरकार स्टार्ट अप पॉलिसी में किसी तरह का लाइसेंस लेने के लिए सरकार सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था करेगी। इसके लिए ज्यादातर प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से ही पूरी की जा सकेगी यानी किसी तरह का लाइसेंस लेने के लिए युवाओं को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
युवाओं के साथ अन्य को भी मौका
पॉलिसी में युवाओं को केंद्र में रखा जा रहा है, लेकिन इसमें अन्य लोगों को भी बराबर का मौका दिया जाएगा। अन्य उद्योग क्षेत्रों में काम कर रहे लोग भी किसी अन्य उद्योग को शुरू करने के लिए सरकार की योजना का लाभ उठा सकेंगे।
गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
जानकारी के मुताबिक नई स्टार्ट अप पॉलिसी में ऐसे उद्योगों को बढ़ावा दिए जाने पर ज्यादा फोकस किया जाएगा जिनसे किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं पैदा होता है। इसमें सॉफ्टवेयर विकसित करने, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी चीजें विकसित करने, सोलर प्लांट्स जैसी प्रकृति संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को बढ़ावा देने और किसानों-कृषि से जुड़ी चीजों को विकसत करने पर जोर देने की योजना है।
इसके साथ ही सरकार ऐसे लघु उद्योग स्थापित करने वाली महिलाओं, युवाओं को भी विशेष ध्यान रखकर चल रही है, जो सिलाई-कढ़ाई, बुनाई जैसे पारंपरिक उद्योगों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए इच्छुक लोग वोकेशनल ट्रेनिंग प्राप्त कर अपनी छोटी इकाई स्थापित कर सकेंगे। इसके लिए भी उन्हें उचित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
चैम्बर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने कहा कि सरकार नई नीति के माध्यम से दिल्ली के युवाओं को रोजगार देने में सक्षम बनाना चाहती है। सरकार का प्रयास है कि इस नीति के माध्यम से दिल्ली का कोई भी युवा बेरोजगार न रहे। उसके पास जो भी हुनर है, उसका इस्तेमाल कर वह देश के लिए उत्पादक की भूमिका निभाये। सरकार इसी दृष्टि से काम कर रही है और जल्दी ही राजधानी के युवाओं, महिलाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों को इसका लाभ मिलेगा।