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Delhi NCR News: स्पाइन सर्जरी में रोबोटिक्स और नेविगेशन तकनीक पर जोर
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-कार्यक्रम में देशभर से स्पाइन सर्जन और हेल्थकेयर विशेषज्ञ शामिल हुए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रीढ़ की हड्डी के इलाज में रोबोटिक्स, नेविगेशन सिस्टम और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इन तकनीकों से जटिल स्पाइन सर्जरी को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाने में मदद मिल रही है। यह जानकारी एक निजी अस्पताल की ओर से आयोजित स्पाइन कोर्स 2026 में सामने आई। कार्यक्रम में देशभर से स्पाइन सर्जन और हेल्थकेयर विशेषज्ञ शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने कमर और गर्दन की रीढ़ की समस्याओं के अलावा स्कोलियोसिस, काइफोसिस, लॉर्डोसिस और स्पोंडिलोलिस्थिसिस जैसी स्थितियों पर जानकारी साझा की। स्पाइनल इंफेक्शन, रीढ़ की चोट, ट्यूमर और ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़ी समस्याओं के इलाज पर भी चर्चा हुई। सर्जिकल वीडियो, एक्सपर्ट सेशन, पैनल चर्चा और डिबेट के जरिए डॉक्टरों को नई तकनीकों के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
अस्पताल में स्पाइन सर्विसेज के चीफ और डायरेक्टर डॉ. कालीदत्त दास ने कहा कि रोबोटिक्स, नेविगेशन और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से स्पाइन के इलाज में तेजी से बदलाव हो रहा है। अस्पताल बेहतर सर्जिकल सटीकता, मरीजों की सुरक्षा और तेज रिकवरी के लिए नई तकनीकों पर लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम डॉक्टरों के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रीढ़ की हड्डी के इलाज में रोबोटिक्स, नेविगेशन सिस्टम और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इन तकनीकों से जटिल स्पाइन सर्जरी को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाने में मदद मिल रही है। यह जानकारी एक निजी अस्पताल की ओर से आयोजित स्पाइन कोर्स 2026 में सामने आई। कार्यक्रम में देशभर से स्पाइन सर्जन और हेल्थकेयर विशेषज्ञ शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने कमर और गर्दन की रीढ़ की समस्याओं के अलावा स्कोलियोसिस, काइफोसिस, लॉर्डोसिस और स्पोंडिलोलिस्थिसिस जैसी स्थितियों पर जानकारी साझा की। स्पाइनल इंफेक्शन, रीढ़ की चोट, ट्यूमर और ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़ी समस्याओं के इलाज पर भी चर्चा हुई। सर्जिकल वीडियो, एक्सपर्ट सेशन, पैनल चर्चा और डिबेट के जरिए डॉक्टरों को नई तकनीकों के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
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अस्पताल में स्पाइन सर्विसेज के चीफ और डायरेक्टर डॉ. कालीदत्त दास ने कहा कि रोबोटिक्स, नेविगेशन और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से स्पाइन के इलाज में तेजी से बदलाव हो रहा है। अस्पताल बेहतर सर्जिकल सटीकता, मरीजों की सुरक्षा और तेज रिकवरी के लिए नई तकनीकों पर लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम डॉक्टरों के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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