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डूसू चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही आरोप-प्रत्यारोप शुरू

Sun, 26 Aug 2018 10:18 PM IST
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 26 Aug 2018 10:18 PM IST
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Electoral politics has begun in DUSU election 2018 after election date fix

डीयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। यूनिवर्सिटी में 12 सितम्बर को मतदान होगा। इसी के साथ डीयू में चुनावी राजनीति की शुरुआत हो गई है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष फैराज खान ने  आरोप लगाया है कि भाजपा समर्थित छात्र संगठन एबीवीपी ने साल 2016-17 में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में जमकर भ्रष्टाचार किया था।

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छात्रसंघ को मिले 26 लाख रुपये में से 22 लाख रुपये (कुल का लगभग 85 फीसदी) चाय-नाश्ते और विविध के रुप में खर्च कर दिया गया था। यही कारण है कि छात्रों ने उन्हें दुबारा मौका नहीं दिया। फैराज के मुताबिक इस वर्ष यानी 2017-18 में एनएसयूआई ने कुल 26 लाख रुपये में से महज 22 रुपये चाय पर खर्च किया है।
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छात्रों के एक-एक पैसे का विवरण वेबसाइट पर डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं। छात्रों के बीच हमारी साफ छवि के बल पर हम दोबारा भारी जीत हासिल करने में कामयाब रहेंगे।
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एनएसयूआई के नेता खान ने कहा कि इस समय पूरे देश में गोहत्या, फर्जी राष्ट्रवाद और जातीयता के नाम पर जो मॉब लिंचिंग और हिंसा का खेल चल रहा है, देश का युवा उससे बेहद व्यथित है। उसकी आवाज शीघ्र ही ईवीएम मशीनों के द्वारा सामने आने जा रही है। सरकार को इन घटनाओं पर अंकुश लगाना चाहिए अन्यथा उसको इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। 

ये रही हमारी उपलब्धियां

एनएसयूआई नेता फैराज खान ने बताया कि अब देश की राजनीति बदल रही है। लोग अब बातों में यकीन नहीं करते, उन्हें काम दिखना चाहिए। इस दौर में एनएसयूआई ने जो काम किया है, वह लोगों के सामने है। हमने पूरे साल विश्वविद्यालय को हिंसामुक्त रखने में सफलता पाई है।

लगभग सभी कॉलेजों में सीसीटीवी लगवाने, सैनिटरी पैड्स की मशीनें लगवाने और बसों-मेट्रो की सेवाएं दिलवाने में कामयाब रहे हैं। ये वे काम हैं जो छात्रों को सीधे लाभ पहुंचा रहे हैं और छात्र उनको देख रहे हैं। 

फैराज के मुताबिक इस बार उनके चुनावी मैनीफेस्टो में दिल्ली मेट्रो में फ्री पास, छात्रों को मुफ्त लैपटॉप दिलवाना और छात्रों को दस रुपये में खाना दिलवाने का मुद्दा सबसे अहम रहेगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में अनेक जगह सरकारों के सहयोग से पांच से दस रुपये में खाना दिलवाया जा रहा है। 

राहुल बनेंगे देश के पीएम

तो ऐसी व्यवस्था दिल्ली विश्वविद्यालय में क्यों नहीं लागू की जा सकती। अगर गरीब किसानों के परिवारों से आए हुए छात्रों को कम दाम पर खाना और आवागमन का सस्ता विकल्प मिल जाएगा तो वे बेहतर ढंग से पढ़ाई कर पाएंगे और इससे उनका ही नहीं, बल्कि पूरे देश का विकास होगा।

फैराज के मुताबिक पूरे देश के विश्वविद्यालयों में इस समय वे युवाओं के अंदर एक बदलाव देख रहे हैं। युवा देश के अंदर बने हिंसा के माहौल से चिंतित हैं। वे बदलाव चाहते हैं। ये आवाज सिर्फ युवाओं की आवाज नहीं हैं।

ये करोड़ों परिवारों के अंदर समाज की घटनाओं पर लेकर चल रही चिंताओं की अभिव्यक्ति है। यह अभिव्यक्ति राहुल गांधी को पीएम बनाने की ओर जा रही हैं। उन्होंने उम्मीद जाहिर किया कि देश इस बार एक बेहतर विकल्प देगा।  
   
 
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