बच्ची से रेप करने वाले वाले को नहीं मिली राहत
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हाईकोर्ट ने आठ वर्षीय बच्ची से रेप मामले में दोषी मो. अनुलुद्दीन को राहत प्रदान करने से इनकार करते हुए उसे मिली 10 वर्ष कैद की सजा को उचित ठहराया है।
अदालत ने दोषी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि आपसी दुश्मनी के चलते उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने अपने फैसले में दोषी की अपील खारिज करते हुए कहा कि सभी साक्ष्यों से स्पष्ट है कि उसी ने बच्ची का यौन शोषण किया।
अदालत ने दोषी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि एक रात के बाद प्राथमिकी दर्ज करवाई गई। अदालत ने कहा कि घटना के बाद बच्ची की मां ने रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए नौकरी पर गए अपने पति का इंतजार किया और रात की देरी भी मात्र इस कारण हुई कि वे अपने परिवार की प्रतिष्ठा के कारण तुंरत रिपोर्ट नहीं दर्ज करवा पाए।
अदालत ने कहा कि दोषी के इस तर्क में भी कोई आधार नहीं है कि उसे दुश्मनी के चलते फर्जी मामले में फंसाया गया है क्योंकि बिहार में वे एक ही स्थान पर साथ रहते रहे है और उनके बीच झगड़ा हुआ था।
10 साल की सजा सही इस आरोपी को
ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं मिला जिससे साबित हो कि दोनों परिवारों के बीच कोई दुश्मनी थी। इसके अलावा पीड़ित बच्ची ने अदालत के समक्ष दिए बयानों में स्पष्ट कहा है कि दोषी ने उसके साथ गलत काम किया था।
अदालत ने आगे कहा कि आरोपी को 10 वर्ष की सजा उचित है। अदालत ने कहा कि उनके समक्ष तथ्य आया है कि दोषी गरीब तबके से है और 50 हजार रुपये जुर्माना देने की हालत में नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत ने उसे छह माह अतिरिक्त सजा का आदेश दिया है। ऐसे में वे दोषी की गरीबी की हालत देखते हुए जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा घटा कर 15 दिन करते है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना थाना प्रसाद नगर की है। बच्ची की मां ने आरोप लगाया था कि दोषी ने 4 अप्रैल 2009 को बच्ची को घर में अकेली देख उससे रेप किया था।