प्रवर्तन निदेशालय ने जब्त की 'काली कमाई के कुबेर' यादव सिंह की 20 करोड़ की संपत्ति
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह के खिलाफ मनी लांड्रिंग के आरोपों की जांच के सिलसिले में 20 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली। ईडी का कहना है कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया गया है।
जब्त संपत्तियों में तीन कंस्ट्रक्शन कंपनियां और एक फर्म है जो कि कथित तौर पर यादव सिंह की पत्नी का है। ईडी के मुताबिक कुल 9.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईडी ने 2015 में मनी लांड्रिंग के दो मामलों में यादव सिंह को घेरे में लिया था। इस मामले में सीबीआई ने आरोप पत्र भी दाखिल किया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने कथित भ्रष्टाचार और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के मामले में यादव सिंह और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दो मामले दर्ज किए थे।
यह मामला तब सामने आया था जब आयकर विभाग ने यादव सिंह और अन्य के खिलाफ कर चोरी के आरोप में जांच शुरू की थी। सीबीआई ने कहा था कि 2009 से 2014 की अवधि के दौरान के आयकर रिटर्न और अन्य रिकॉर्ड्स की जांच की गई।
उस दौरान तत्कालीन चीफ इंजीनियर और उनके परिवार की कुल बचत 1.70 करोड़ रुपये थी। वहीं, उनके पास 3.60 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति थी। उस दौरान यादव सिंह के एक सहयोगी से करीब 10 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे, जो कि कथित तौर पर यादव सिंह के ही बताए गए थे।
पीएमएलए के तहत संपत्ति को जब्त करने का आदेश इसलिए दिया जाता है ताकि उस धन से आरोपी कुछ दूसरा लाभ न ले सके। हालांकि इस मामले में 180 दिन के भीतर कानून के मुताबिक दूसरे पक्ष की ओर से संबंधित एजेंसी के सामने चुनौती दी जा सकती है।