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दिल्ली : मछली के गॉल ब्लैडर को खाने से किडनी हुई प्रभावित, सर गंगा राम अस्पताल में हुआ सफल इलाज

Thu, 04 May 2023 06:07 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 04 May 2023 06:07 PM IST
सार

मछली के पित्ताशय का कच्चा सेवन भारत सहित एशिया के कुछ क्षेत्रों विशेष रूप से पूर्वी और दक्षिणी भारत में एक आम बात है। इससे कई तरह की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं और किडनी प्रभावित हो सकती है।

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Eating raw gall bladder of fish can cause kidney failure said Sir Ganga Ram hospital
मछली के शरीर का विवरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में किडनी के रोग से प्रभावित एक व्यक्ति का सफल इलाज किया गया। रांची की रहने वाली 48 वर्षीय सेता देवी को उल्टी और गंभीर गुर्दे की बीमारी के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पूछताछ करने पर यह पता चला कि उसने एक स्थानीय नीम हकीम की सलाह पर अपने मधुमेह की बीमारी को ठीक करने के लिए तीन दिनों तक स्थानीय रूप से उपलब्ध रोहू (लेबियो रोहिता) मछली के कच्चे पित्ताशय का सेवन किया। कुछ ही दिनों के बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी और उल्टी होने लगी।

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उसकी स्थिति को देख परिजन उसे सर गंगा राम अस्पताल ले आए। उसे नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गया, जहां उसे हेमोडायलिसिस के दो सत्र हुए। उसकी किडनी की बायोप्सी से उसमें गंभीर सूजन का पता चला। सहायक उपचार के साथ उसे उच्च खुराक वाले स्टेरॉयड पर शुरू किया गया। सातवें दिन तक उसकी किडनी ठीक होने लगी और दो सप्ताह के बाद उसे सामान्य किडनी फंक्शन के साथ छुट्टी दे दी गई।

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कच्ची मछली के पित्ताशय का कच्चा सेवन भारत सहित एशिया के कुछ क्षेत्रों विशेष रूप से पूर्वी और दक्षिणी भारत में एक आम बात है। यह पारंपरिक रूप से मधुमेह मेलेटस, ब्रोन्कियल अस्थमा, गठिया और दृश्य गड़बड़ी को ठीक करने के लिए माना जाता है। सबसे आम तौर पर रोहू और कतला मछली हैं, जो दोनों आमतौर पर देश के कई हिस्सों में खपत होती हैं।

डॉ. ए.के. भल्ला, चेयरमैन, डिपार्टमेंट ऑफ नेफ्रोलॉजी, सर गंगा राम अस्पताल ने कहा कि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि गुर्दे की बीमारी का जोखिम मछली की इन दो प्रजातियों तक ही सीमित नहीं है और अन्य प्रकार की मछलियों के पित्ताशय की थैली के सेवन से भी हो सकता है। इसलिए पूरी तरह से कच्ची मछली की पित्ताशय को खाने से बचने की सलाह दी जाती है। 

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मछली के पित्त में साइप्रिनॉल नामक विष होता है, जो मनुष्यों में गुर्दे को नुकसान पहुंचाता है। गंभीर मामलों में इसके सेवन से गुर्दा फेल और यहां तक कि मौत का कारण बन सकती है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि मछली ठीक पकाई गई है, क्योंकि इससे मछली में मौजूद विषाक्त पदार्थों के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है।

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