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करोड़ों के नामी कंपनियों के नकली मोबाइल बरामद

Fri, 01 Jan 2016 10:07 AM IST
Updated Fri, 01 Jan 2016 10:07 AM IST
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Duplicate mobile of two caroresrecovered

अगर आप नामी ब्रांड के महंगे मोबाइल खरीदने की योजना बना रहे थे, तो यह खबर आप को चौंका सकती है। जी हां, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने नामी मोबाइल कंपनी के नकली मोबाइल (क्लोन) बनाने वाले गिरोह के चार लोगों को दबोचा है।

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आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी रविंद्र पाल सिंह (43), किरणदीप सिंह (38), गांव खांदिया, रामपुर निवासी रणजीत सिंह (24) और गांव अलीपुर माजरा, रामपुर निवासी सुखदेव सिंह (32) के रूप में हुई है।
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पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 10 हजार नकली मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनकी कीमत दो करोड़ रुपये बताई जा रही है। पुलिस की मानें, तो चीन से मोबाइल के पार्ट्स मंगाकर उन्हें जोड़कर नामी कंपनी के नकली मोबाइल तैयार किए जाते थे।
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ऐसे हुई इनकी गिरफ्तारी

Duplicate mobile of two caroresrecovered

संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि एक दिसंबर को अपराध शाखा ने लाजपतराय मार्केट से कुछ नकली मोबाइल फोन बरामद किए थे। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि किसी रविंद्रपाल सिंह नामक शख्स का सिम कार्ड इन फोन में इस्तेमाल किया गया था।


इसके साथ इन मोबाइल पर जो आईएमईआई नंबर थे, उनका सॉफ्टवेयर भी अलग था। दिया गया आईएमईआई नंबर पहले ही दूसरे असली फोन पर अंकित था। इससे न सिर्फ अपराधियों को बल मिल रहा था, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा था।

सूचना के बाद छापा मारकर रविंद्र्रपाल सिंह, सुखदेव सिंह, रणजीत सिंह और किरणदीप सिंह को दबोच लिया गया। इनकी निशानदेही पर मटियाला के गोदाम से 10 हजार नकली मोबाइल फोन बरामद किए गए। जांच के दौरान पता चला कि गैंग का मुख्य आरोपी किरणदीप सिंह और उसका चचेरा भाई इंदरपाल सिंह है। फिलहाल इंदर फरार है। पुलिस टीम उसकी तलाश कर रही है।

ऐसे बनाते थे क्लोन मोबाइल फोन

Duplicate mobile of two caroresrecovered

किरणदीप और इंदरपाल चीन से मोबाइल फोन के पार्ट्स मंगातेे थे। रविंद्रपाल जो सैमसंग कंपनी के सर्विस सेंटर में काम कर चुका है, वह रणजीत व सुखदेव के साथ मिलकर मटियाला के गोदाम में मोबाइल के पार्ट्स जोड़कर नकली मोबाइल (क्लोन) बनाता था।

इन मोबाइल फोन पर स्टैंपिंग मशीन से अलग-अलग कंपनी (सैमसंग, नोकिया, कार्बन, स्पाइस और लावा) के स्टीकर व लोगो लगा देते थे। आईएमईआई नंबर डालने के लिए एक विशेष तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता था। बाद में इन मोबाइल फोन को असली दिखने वाली पैकिंग में डालकर महंगे दामों पर मार्केट में सप्लाई के लिए भेज दिया जाता था।

किरणदीप सिंह स्नातक करने के बाद 1992 में बैंकॉक चला गया था। वहां 10 साल बिताने के बाद वह अमेरिका चला गया। वहां 12 साल रहने के बाद उसे अमेरिका की नागरिकता मिल गई। 2012 में वह भारत वापस आ गया।

यहां आने के बाद उसने मोबाइल फोन की बैटरी का काम शुरू किया, लेकिन इसमें उसे घाटा हुआ। बाद में उसने इंदरपाल की मदद से चाइना से मोबाइल पार्ट्स इंपोर्ट कर नकली मोबाइल बनाना शुरू कर दिया। इस काम में रविंद्रपाल, सुखदेव और रणजीत ने उसकी मदद की। पुलिस इंदरपाल की तलाश कर रही है।

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