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हवा के मंद पड़ने से राजधानी में नहीं घट रहा प्रदूषण स्तर
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 21 Apr 2016 11:49 AM IST
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- फोटो : अनिल कुमार
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सम-विषम स्कीम प्रदूषण का इलाज हैं या नहीं। इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग हो सकती है। लेकिन परिवेशी वायु गुणवत्ता की मॉनिटरिंग कर रही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) और द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) की ओर से लगातार जारी किए जा रहे आंकड़े बताते हैं कि, दिल्ली-एनसीआर में धूल युक्त प्रदूषण यानी पर्टिकुलेट मैटर और गैसीय प्रदूषण में कमी नहीं आ रही है।
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टेरी की मानें तो तय मानकों से अधिक हासिल होने वाले प्रदूषण के आंकड़ों में हवा प्रबल तरीके से जिम्मेदार है। मंद गति से राजधानी में प्रवेश करने वाली हवा प्रदूषण स्तर को सुधारने में नाकाम साबित होती है। वहीं जिस दिन हवा की गति तेज होती है उस दिन प्रदूषण स्तर में सुधार देखा जाता है। इसके अलावा जिन उपकरणों के जरिए यह आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। उनकी विश्वसनीयता पर भी पुख्ता दावा नहीं किया जा रहा है।
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हवा में नहीं घट रहे धूल के खतरनाक कण
टेरी के जरिए 19 अप्रैल (24 घंटे के आधार पर) को दिल्ली-एनसीआर में कुल 9 स्थानों पर रिकॉर्ड किए गए आंकड़े बताते हैं कि सभी जगह पर्टिकुलेट मैटर (हवा में मौजूद खतरनाक बारीक कण) 2.5 और पीएम 2.5 तय मानकों से अधिक रिकॉर्ड किए गए। इसके अलावा गैसीय प्रदूषण में भी कोई कमी नहीं आई है।
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टेरी के मुताबिक मंद गति की हवा के कारण एनसीआर में पीएम 2.5 में 1.3 से 2.6 गुना तक और दिल्ली के भीतर पीएम 10 में 2.5 से 3.8 गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा गैसीय प्रदूषण में नाइट्रोजन ऑक्साइड में भी दिल्ली के भीतर बढोतरी दर्ज की गई है। इसका कारण मंद गति से बहने वाली हवा और मौसम में होने वाले बदलाव को बताया गया है।
एनसीआर में पीएम 2.5 में दर्ज की गई बढ़ोत्तरी
टेरी की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा, गाजियाबाद और गुडग़ांव में 19 अप्रैल को रिकॉर्ड किए गए पीएम 2.5 में तय मानक से अधिक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। नोएडा में पीएम 2.5 तय मानक से अधिक 128 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। वहीं गाजियाबाद में पीएम 2.5 तय मानक से अधिक 132 और गुडग़ांव में 87 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। पीएम 2.5 का तय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है।
हाईटेक मोबाइल वैन सीधे क्लाउड में भेजती है डाटा
डीपीसीसी की ओर से सम-विषम योजना के दौरान 74 स्थानों पर परिवेशी वायु गुणवत्ता की मॉनिटरिंग की जा रही है। इस जांच में डीपीसीसी के 6 स्टेशन और मोबाइल वैन का भी सहारा लिया जा रहा है।
इसी जांच में शामिल न्यूजीलैंड की भारत में प्रतिनिधित्व करने वाली एक कंपनी एनईवीसीओ इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से हाईटेक उपकरण युक्त एक मोबाइल वैन भी परिवेशी वायु गुणवत्ता के नमूने एकत्र कर रही है। हालांकि अंतिम विश्लेषण डीपीसीसी के जरिए ही किया जा रहा है।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आदर्श कुमार ने बताया कि वायु गुणवत्ता जांच करने वाले सभी उपकरणों पर दावा नहीं किया जा सकता। हालांकि उनकी कंपनी के एक मोबाइल वैन में लगे हुए यंत्र के जरिए 24 घंटे आंकड़े इकट्ठा होते हैं जो डाटा को सीधे क्लाउड में भेजते हैं। इससे डाटा के साथ छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता। डीपीसीसी के जरिए बीते हफ्ते के रिकॉर्ड किए गए परिवेशी वायु गुणवत्ता में भी प्रदूषण स्तर अधिक पाया गया था।
सीपीसीबी का रीयल टाइम डाटा
सीपीसीबी के रीयल टाइम डाटा के मुताबिक बुधवार को शादीपुर, एनएसआईटी द्वारका, मंदिर मार्ग, आरके पुरम, पंजाबी बाग में भी परिवेशी वायु गुणवत्ता तय मानकों से अधिक दर्ज किए गए। पविरेशी वायु गुणवत्ता का सामान्य स्तर 200 तक माना जाता है। इन सभी जगहों पर मानक से अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया है।