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Delhi NCR News: डीयू ने माइनर डिग्री के लिए जीई विषयों की शर्त हटाई
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-अनिवार्यता को लेकर छात्र और शिक्षक जता रहे थे विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने माइनर डिग्री के लिए जेनेरिक इलेक्टिव (जीई) विषय चुनने की अनिवार्यता वाले नियम को वापस ले लिया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय ने अधिसूचना जारी की है। जीई विषयों की शर्त को लेकर शिक्षक और छात्र काफी दिनों से विरोध जता रहे थे।
अधिसूचना के अनुसार छात्रों को किसी विशेष अनुशासन से जीई लेने की कोई अनिवार्यता नहीं होगी। जो छात्र किसी विशेष अनुशासन में माइनर के रूप में पीजी प्रोग्राम के योग्य बनना चाहते हैं वह जीई विषयों में से किसी भी जीई विषय का चयन कर सकते हैं। इससे पहले जीई विषयों में तीन विषयों को अनिवार्य किया गया था। डीयू का मानना है कि माइनर डिग्री औपचारिक नहीं होनी चाहिए। छात्र उस डिग्री के आधार पर पीजी में दाखिला लेंगे। ऐसे में छात्रों के पास विषय की गहन जानकारी नहीं होगी और शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ेगा।
वहीं शिक्षकों और छात्रों का तर्क था कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा सुझाए बहु-विषयक दृष्टिकोण के विरुद्ध है। इससे पहले आखिरी बार मार्च में एक अधिसूचना जारी कर विवि ने विषय लेना अनिवार्य किया था। मगर, अब जीई विषयों की शर्त हटने से उन्हें विषयों के चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी। छात्र अपनी रुचि और करियर के अनुसार विषय का चुनाव कर सकेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने माइनर डिग्री के लिए जेनेरिक इलेक्टिव (जीई) विषय चुनने की अनिवार्यता वाले नियम को वापस ले लिया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय ने अधिसूचना जारी की है। जीई विषयों की शर्त को लेकर शिक्षक और छात्र काफी दिनों से विरोध जता रहे थे।
अधिसूचना के अनुसार छात्रों को किसी विशेष अनुशासन से जीई लेने की कोई अनिवार्यता नहीं होगी। जो छात्र किसी विशेष अनुशासन में माइनर के रूप में पीजी प्रोग्राम के योग्य बनना चाहते हैं वह जीई विषयों में से किसी भी जीई विषय का चयन कर सकते हैं। इससे पहले जीई विषयों में तीन विषयों को अनिवार्य किया गया था। डीयू का मानना है कि माइनर डिग्री औपचारिक नहीं होनी चाहिए। छात्र उस डिग्री के आधार पर पीजी में दाखिला लेंगे। ऐसे में छात्रों के पास विषय की गहन जानकारी नहीं होगी और शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ेगा।
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वहीं शिक्षकों और छात्रों का तर्क था कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा सुझाए बहु-विषयक दृष्टिकोण के विरुद्ध है। इससे पहले आखिरी बार मार्च में एक अधिसूचना जारी कर विवि ने विषय लेना अनिवार्य किया था। मगर, अब जीई विषयों की शर्त हटने से उन्हें विषयों के चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी। छात्र अपनी रुचि और करियर के अनुसार विषय का चुनाव कर सकेंगे।
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