दिल्ली: 200 बसों का ‘पुनर्जन्म’, सड़कों पर भरेंगीं फर्राटा
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दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रही डीटीसी बसों की हालत दिनों-दिन खस्ता और समयावधि पूरी होती जा रही है, लेकिन दिल्ली परिवहन विभाग ने इन बसों की लाइफ बढ़ाने का रास्ता निकालकर इन्हें कबाड़ में जाने से लगभग दो साल के लिए बचा लिया है। दरअसल, डीटीसी की मौजूदा बसों में से करीब 200 बसें हाल ही में समयावधि पूरी कर चुकी हैं। नई बसें आने तक पुरानी बसों को संचालित रखने के लिए दिल्ली सरकार व डीटीसी अधिकारियों ने बस निर्माता कंपनियों के साथ एन्युअल मेंटिनेंस कॉन्ट्रैक्ट (एएमसी) पर हस्ताक्षर कर के इन बसों की लाइफ बढ़ाई है।
कॉमनवेल्थ गेम्स के मद्देनजर राजधानी में वर्ष 2007 से लेकर 2010 तक 2250 डीटीसी लो-फ्लोर नॉन एसी और 1700 लो-फ्लोर एसी बसों को लाया गया था। इन बसों के आने के बाद डीटीसी के बेड़े में शामिल डीटीसी की पुरानी स्टैंडर्ड फ्लोर बसों को धीरे-धीरे डीटीसी फ्लीट से बाहर कर दिया गया था। साथ ही, दिल्ली में क्लस्टर स्कीम के तहत बसें लाई गईं। वर्तमान में डीटीसी और क्लस्टर बसों की संख्या 5500 है, लेकिन दिल्ली की आबादी के हिसाब से यहां 11000 बसों की जरूरत है।
डीटीसी के विभागीय सूत्रों के मुताबिक, डीटीसी की लो-फ्लोर बसों की समयावधि साढ़े 7 लाख किमी चलने या 12 साल पूरे करने तक निर्धारित है। पहले फेज में लाई गई 200 से अधिक बसों की समयावधि पूरी हो चुकी है। परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत की अध्यक्षता में बुलाई गई डीटीसी बोर्ड की बैठक में इन बसों की लाइफ बढ़ाने के लिए न्यू एएमसी हस्ताक्षर किया गया। न्यू एएमसी के तहत समयावधि पूरी करने वाली बसों के 1 लाख 20 हजार किमी बढ़ाए गए गए हैं। साथ ही दो साल का समय भी बढ़ाया है। इनमें से जो भी पहले पूरा होगा उसके तहत इन बसों को सड़कों से हटा दिया जाएगा। फिलहाल जिन बसों की न्यू एएमसी के तहत लाइफ बढ़ाई गई है वे नेताजी सुभाष प्लेस डिपो की हैं।
अन्य बसों पर भी लागू होगी न्यू एएमसी
न्यू एन्युअल मेंटिनेंस कॉन्ट्रैक्ट के तहत बस निर्माता कंपनी टाटा और लीलैंड के साथ करार पर हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस कॉन्ट्रैक्ट को इस तरह तैयार किया गया है कि समयावधि पूरी करने वाली बसें ऑटोमेटिक तरीके से न्यू एएमसी के दायरे में आ जाएंगी और उनके एक लाख 20 किमी और चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा। टाटा और लीलैंड बस निर्माता कंपनियां इन बसों की कॉन्ट्रैक्ट के तहत मरम्मत का जिम्मा संभालेंगी।
हाइड्रोलिक और न्यूमैटिक प्रेशर होने लगा कमजोर
डीटीसी की बसों में हाइड्रोलिक प्रेशर से ब्रेक लगते हैं और न्यूमैटिक प्रेशर से दरवाजे खुलते और बंद होते हैं। नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बस चालकों ने बताया कि बसों का हाइड्रोलिक प्रेशर कम होने की वजह से कई बार बसों के ब्रेक ठीक से काम नहीं करते, जिस कारण हादसे का डर रहता है। न्यूमैटिक प्रेशर कम होने की वजह से कभी-कभी दरवाजे पूरी तरह नहीं खुल पाते हैं। इस संबंध में डीटीसी प्रबंधन का कहना है कि जिन बसों में ऐसी शिकायतें मिलती हैं, उनके हाइड्रोलिक और न्यूमैटिक प्रेशर वाले सिलिंडरों को तत्काल बदलकर पूरे सिस्टम को बदल दिया जाता है।