सपने देखना जरूरी, नहीं आते तो समझो बीमारी
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नींद में लंबे समय से सपने नहीं आ रहे हैं तो आपके लिए खतरे की घंटी है। सपने नहीं आने का मतलब है कि ब्रेन (दिमाग) में नोराड्रीनालाइन केमिकल बन चुका है और उसने गहरी नींद में सहायक न्यूरोन (कोशिका) पर कब्जा करना शुरू कर दिया है।
नोराड्रीनालाइन केमिकल से शरीर के वभिन्नि अंगों पर प्रभाव पड़ता है, जिससे बीमारियां दस्तक देने लगती हैं। यह किसी साधारण रिसर्च से निकला परिणाम नहीं है।
बल्कि देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान जवाहर लाल नेहरू के एक वैज्ञानिक के 26 साल की मेहनत के बाद इस बड़े सच का खुलासा हुआ है। अगर आप इस बीमारी पीड़ित हैं तो जल्द ही उपचार का रुख करें। क्योंकि इन दिनों अचानक इस बीमारी में जबर्दस्त इजाफा हुआ है।
JNU वैज्ञानिक ने 26 साल में क्या ढूंढा?
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेस के डीन व प्रोफेसर ऑफ न्यूरोबॉयलोजी प्रो. बीरेंद्र नाथ मलिक के 26 साल के शोध को स्लीप मेडिसिन रिव्यू ने अपने जरनल में छापा है। रिव्यू उन्हीं चुनिंदा शोध को आमंत्रित करती हैं, जिन्हें क्लीनिकल ट्रायल के लिए प्रयोग किया जाता है।
स्लीप मेडिसिन रिव्यू के अलावा इंटरनेशनल मेडिकल एसोसिएशन और केंद्र सरकार की डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ साइंसेस ने भी उनके शोध को मान्यता दी है। डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ साइंसेस ने रिपोर्ट के आधार पर नींद विषय पर एक कमेटी भी गठित की है, ताकि रिपोर्ट के आधार पर लोगों को बीमारियों से बचाने पर कारगर कदम उठाए जा सकें।
प्रो. मलिक के मुताबिक उन्होंने वर्ष 1988 में नींद पर शोध शुरू किया था। जो अब 2014 में पूरा हुआ है। हालांकि नींद विषय पर उनका शोध अभी आगे भी जारी रहेगा।
कब आते हैं सपने?
इस स्टेज पर एक से डेढ़ घंटे बिताने के बाद रेम स्लीप (रेपिड आई मूवमेंट स्लीप) यानि गहरी नींद में जाते हैं। इसी पीरियड में व्यक्ति सपने देखता है।
सामान्य रूप से एक आदमी 6 से 7 घटे की नींद लेता है, जिसके दौरान 3 से 5 बार सपने आते हैं। प्रो. मलिक के मुताबिक, हमारे दिमाग की वेकअप एक्टिव न्यूरोन (कोशिका) जगाने में मदद करती है। उसी तरह स्लीप एक्टिव कोशिका हमें सुलाने में सहायक होती है।
क्या है बीमारी का कारण?
यदि रेम ऑफ कोशिका उस दौरान बंद नहीं होती है तो हम गहरी नींद में नहीं जा पाते हैं। गहरी नींद में न जाने से ब्रेन में नोराड्रीनालाइन केमिकल बनता है। दिमाग में नोराड्रीनालाइन केमिकल की अधिकता से अन्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है।
इससे धीरे-धीरे डिजनरेटिव डिस्आर्डर (कोशिकाएं मर जाती हैं) हो जाता है और शरीर के विभिन्न अंगों को दिए जाने वाले निर्देशों का सही पालन नहीं करने से अंगों पर प्रभाव पड़ने लगता है।
कैसे पता चलेगा कि आप बीमार हैं?
गहरी नींद में न जाने से ब्रेन में नोराड्रीनालाइन केमिकल बनता है। दिमाग में नोराड्रीनालाइन केमिकल की अधिक होने पर अन्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है और नींद पूरी न होने के चलते चीजों को याद रखने में कमी आती है।
वहीं बार-बार जुकाम, सर्दी, खांसी, बुखार आता रहता है। उसके बाद हाथ-पैर की उंगलियां कांपनी शुरू हो जाती हैं।
जेएनयू के प्रोफेसर इस शोध को स्लीप मेडिसिन रिव्यू के अलावा इंटरनेशनल मेडिकल एसोसिएशन और केंद्र सरकार की डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ साइंसेस ने भी उनके शोध को मान्यता दी है।