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नम्रता ने 6 पेज में CM को बताया अपना दुख

Tue, 30 Sep 2014 05:22 PM IST
Updated Tue, 30 Sep 2014 05:22 PM IST
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Dr. Harish Chandra suicide case opens.

ग्रेटर नोएडा के कांशीराम मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हरीश चंद्रा की बेटी नम्रता ने उनकी मौत के लिए सीबीआई को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि उनके पिता को नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में आरोपी बनाया गया था।

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इस कारण सीबीआई ने डॉक्टर के लखनऊ स्थित घर पर छापा भी मारा था, लेकिन वहां पर  कुछ नहीं मिला। उन्होंने कोई घोटाला ही नहीं किया लेकिन सीबीआई उन्हें गिरफ्तार करने की योजना बना रही थी। इस डर से उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
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नम्रता ने बताया कि सीबीआई उनके पिता को गलत फंसा रही थी। सीबीआई ने उन्हें अस्पताल में दवा खरीदने के मामले में आरोपी मानते हुए चार्जशीट फाइल की थी। उसमें भी चार लोग शामिल थे। जो घोटाले के बताए गए चार लाख रुपयों में से तीन लाख जमा करने वाले थे।
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घरवालों को बताया था सारा केस

Dr. Harish Chandra suicide case opens.

घोटाले मामले में उनके पिता को भी रुपये जमा कराने के लिए कहा गया था। 4 अक्तूबर को उनकी सीबीआई के समक्ष तारीख थी, लेकिन उनको डर था कि अगर सीबीआई इससे पहले उन्हें गिरफ्तार कर लेती है तो पांच-छह माह जेल में रहना पड़ेगा।

सीबीआई अदालत करीब छह माह तक जमानत नहीं देती है। भले ही कोई व्यक्ति बेकसूर ही क्यों न हो। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने समाज में जो सम्मान कमाया था, उसे कुछ लोगों के कारण धूमिल कर दिया गया।

वे इन सब मामलों से दूर थे, लेकिन सीबीआई की पूछताछ और जांच से परेशान थे। उनके पिता ने घर पर एक-एक बात बताई थी, जिससे वो अपने परिवार की नजरों में न गिरें। उनके पिता ने कोई हेराफेरी नहीं की थी। वह तो इस मामले में न चाहते हुए भी फंस गए।

सुसाइड नोट किया सार्वजनिक

Dr. Harish Chandra suicide case opens.

आरोप है कि डॉ. हरीश चंद्रा के सुइसाइड नोट को पुलिस ने दबाने की कोशिश की। उनकी बेटी ने सुइसाइड नोट को मीडिया के सामने पढ़कर सुनाया।

डॉक्टर ने सुइसाइड नोट में लिखा था, ‘मैं सीबीआई की कार्रवाई से परेशान हूं। निर्दोष होते हुए भी मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही। आगामी तारीख पर सीबीआई मुझे गिरफ्तार कर लेगी। भले ही बाद में मुझे निर्दोष साबित कर दिया जाए लेकिन समाज में जो गरिमा बनाई थी, वह नष्ट हो जाएगी। जिसे मैं सहन नहीं कर पाऊंगा।’

उन्होंने आगे लिखा था ‘बिना कोई पाप किए ही मुझे जलालत, बदनीयती, प्रताड़ना आदि से गुजरना पड़ेगा, इसलिए यह बड़ा कदम उठाने जा रहा हूं। इस कार्य में मेरे परिवार के किसी सदस्य और विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की कोई भूमिका नहीं है। किसी को परेशान नहीं किया जाए।’

बेटी ने कहा 'न्याय दिलवाकर रहूंगी'

Dr. Harish Chandra suicide case opens.

नम्रता ने छह पेज का एक शिकायती पत्र डॉक्टर एसोसिएशन और मुख्यमंत्री को भेजा है। इसमें उन्होंने सभी बात लिखी हैं, जो उनके पापा ने बताई थी। उन्होंने न्याय की गुहार भी लगाई है। नम्रता ने बताया कि वह अपने पिता के माथे पर लगा दाग हटवाकर रहेंगी।

उन्होंने  कोई घोटाला नहीं किया था। उनको एक अधिकारी ने दवा खरीदने के लिए ऑर्डर दिया था और उसी फाइल पर उनके पिता ने हस्ताक्षर किए थे। उनके पिता बस इतने ही दोषी हैं।

अल्ट्रासाउंड मशीन की खरीद पर नहीं किए थे साइन
कांशीराम मेडिकल यूनिवर्सिटी में मशीन घोटाले की बात से साफ इंकार करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पिता का इस मामले में कोई हाथ नहीं था। हां, इतना जरूर था कि एक अधिकारी ने उनके पिता को मशीन खरीदे जानी वाली फाइल पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया था। इस बात से भी वह तनाव में थे।

बताया जा रहा है कि कांशीराम मेडिकल कॉलेज में एक अल्ट्रासाउंड मशीन लाई गई थी, जो बिना अनुमित के खरीदी गई थी। मशीन के लिए 25 लाख रुपये सेंशन हुए थे, जबकि प्राधिकरण और मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने मात्र चार लाख रुपये में इसे ले लिया था। इस मशीन की फाइल पर डॉक्टर डॉ. हरीश चंद्रा के साइन होने थे लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया था।

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