दहेज उत्पीड़न के आरोपी ने मांगी परिवार सहित इच्छा मृत्यु
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दहेज और धरेलू हिंसा के आरोपी डॉ. अक्षय कुमार गौड़ ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को पत्र लिखकर परिवार सहित इच्छा मृत्यु देने की मांग की है। डॉ. अक्षय का कहना है कि यह निर्णय उसने पत्नी और पुलिस और झूठे केस में बूढ़े माता पिता को प्रताड़ित किए जाने से तंग आकर लिया है।
डॉ. अक्षय ने बताया कि उसका विवाह बल्लभगढ़ शहर थाना क्षेत्र निवासी युवती से जुलाई 2014 में हुआ था। उनका आरोप है कि पत्नी का एक पुरुष दोस्त था जिसकी जानकारी उन्हें शादी से पहले नहीं थी। विवाह के बाद से ही पत्नी ने घर वालों से झगड़ा शुरू कर दिया।
डॉ. गौड़ के पिता 31 अक्तूबर 2014 में सरकारी सेवा से रिटायर होने वाले थे। रिटायरमेंट के बाद उन्हें विभाग से फंड आदि के बीस लाख रुपये से अधिक मिलने थे। उनका आरोप है कि इन रुपयों को हड़पने के लिए पत्नी ने अपने दोस्त के साथ साजिश रचते हुए लड़ाई और गाली गलौज शुरू कर दी।
इससे डर कर उनकी माता ने 25 अक्तूबर 2014 को थाने में शिकायत दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 13 दिसंबर को उनकी पत्नी ने बल्लभगढ़ थाने में दहेज और घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया। इसमें डॉ. गौड़ के अलावा उनके माता-पिता और बहन को भी आरोपी बना दिया। उन्हें 23 जनवरी 2015 को गिरफ्तार कर लिया गया।
उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें खतरनाक अपराधी की तरह सीआईए 65 को सौंप दिया गया। उनका आरोप है कि वहां रात में पत्नी के सामने ही उन्हें नंगा करके बुरी तरह पीटा गया, उन पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद पुलिस ने जबरन एक पत्र पर मैं नपुंसक हूं लिखवा कर हस्ताक्षर करवा लिए गए। डॉक्टर ने सीआईए इंचार्ज पर उन्हें छोड़ने के एवज में डेढ़ लाख रुपये सुविधा शुल्क मांगने और यौन शोषण की धमकी देने का आरोप लगाया है।
इसके बाद उनके माता पिता को लगातार पुलिस और ससुरालीजन प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से पत्नी, ससुरालियों और तत्कालीन सीआईए इंचार्ज के खिलाफ जांच करवा कर कार्रवाई करने और दहेज उत्पीड़न व घरेलू हिंसा का झूठा मामला वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हो सकता तो उन्हें और उनके परिवार को इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाए।