Trump की बेरुखी से गुड़गांव में आईटी हब का भविष्य खतरे में
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अमेरिका और प्रदेश सरकार के रुख से साइबर सिटी के आईटी-बीपीओ हब का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। अमेरिकी आउटसोर्सिंग पर निर्भर है इस सेक्टर को डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा कड़ी चुनौती मिल रही है। वहां की संसद में आउटसोर्सिंग पर कैंची चलाने वाला विधेयक लाया गया है।
अगर यह पास हो गया तो गुरुग्राम ही नहीं देश भर की आईटी-बीपीओ कंपनियों पर इसका करारा प्रहार होगा। जिसकी भरपाई कर पाना बेहद मुश्किल होगा। 10 सालों तक यह क्षेत्र खुद को संभाल नहीं पाएगा।
गुरुग्राम के आईटी-बीपीओ हब का करीब 60 फीसदी कारोबार अमेरिकी आउटसोर्सिंग पर निर्भर है। इन्हीं विपरीत परिस्थितियों में हरियाणा सरकार के बजट से इस सेक्टर को ऑक्सीजन की उम्मीद थी। मगर ऐसा कुछ बजट में नहीं है जिससे आईटी हब में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।
यहां चार से पांच लाख प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार प्रभावित होगा
जब से अमेरिका में डोनाल्ट ट्रंप की सरकार बनी है तब से उन पर वहां के नागरिकों का दबाव पड़ रहा है कि वह चुनाव में किए अपने वायदे को वह निभाएं। अमेरिका में रह चुके आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि वहां बेरोजगारी की समस्या काफी बड़ी है।
स्थानीय लोगों को लगता है कि भारतीय उनकी नौकरी छीन रहे हैं। एक के बाद एक करके भारतीय की अमेरिका में हो रही हत्या को भी इसी मानसिकता से जोड़ कर देखा जा रहा है। एच1बी वीजा और आउटसोर्सिंग वहां बड़ा मुद्दा है।
अमेरिका में एक दशक तक रहने वाले हर्वा बीपीओ के सीईओ अजय चतुर्वेदी का कहना है कि अमेरिका में जो कुछ चल रहा है वह गुरुग्राम ही नहीं देश भर के आईटी-आईटीईएस हब के लिए मुश्किल खड़ा करना है। सरकार को इस क्षेत्र के बारे में सोचना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करती है तो यहां चार से पांच लाख प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार प्रभावित होगा।
यूरोप सहित एशियाई देशों में संभावनाओं की तलाश कंपनियों ने शुरू कर दी है
अमेरिकी आउटसोर्सिंग प्रभावित होने के बाद उसका विकल्प तलाशने में कई साल लगेंगे। यूरोप सहित एशियाई देशों में संभावनाओं की तलाश कंपनियों ने शुरू कर दी है।
मगर इसमें काफी समय लगने वाला है। हरियाणा सरकार का लक्ष्य 2020 तक हरियाणा सरकार का लक्ष्य साढ़े चार लाख रोजगार का सृजन आईटी सेक्टर में करना है। मगर इसे लेकर सरकार के बजट में कोई विजन नहीं नजर आ रहा है।
अब अमेरिकी संकट मौजूदा कारोबार को भी खत्म करने वाला साबित होने जा रहा है। हाइटेक इंडिया के अध्यक्ष प्रदीप यादव का कहना है कि बजट में आईटी सेक्टर को गति देने वाली कोई बात नहीं है। मौजूदा रोजगार में भी कमी आने की संभावना है।
वैश्विक मंदी से भी बढ़ा है ट्रंप का संकट...
इसमें काफी बड़ा हिस्सा गुरुग्राम के आईटी-आईटीईएस हब का है। वैश्विक मंदी के दौर में भी यह सेक्टर सिर उठा कर खड़ा रहा मगर ट्रंप द्वारा पैदा किया जा रहा यह संकट इससे काफी बड़ा है। यही कारण है कि इससे निपटने की रणनीति बड़े-बड़े आईटी धुरंधरों को समझ में नहीं आ रहा है।
आउटसोर्सिंग व एच1बी वीजा के मुद्दे पर नैस्कॉम ने अपने स्तर पर प्रयास शुरू कर दिया है। उसका एक प्रतिनिधिमंडल इस मामले में अमेरिकी सरकार से इन पर लचीला रुख अपनाने की अपील कर आया है। आईटी कंपनियों को अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से ही इस मामले में उम्मीद है। प्रधानमंत्री अगले माह अमेरिका के दौरे पर जा रहे हैं।