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दिल्लीः डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर 25 किलो की 97 वर्षीय महिला को बचाया

Fri, 04 Jan 2019 05:09 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 04 Jan 2019 05:09 AM IST
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Doctors saved 25kg 97-year-old woman from surgery in maharaja agrasen hospital
सर्जरी के बाद महिलाओं के साथ डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला

25 किलोग्राम वजन और 97 वर्ष आयु। आमतौर पर इस उम्र और इतने कम वजन में कोई भी डॉक्टर सर्जरी जैसी चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया से गुजरना पसंद नहीं करता। पश्चिम दिल्ली के महाराजा अग्रसेन अस्पताल के डॉक्टरों ने शकुंतला देवी नामक महिला की जटिल सर्जरी कर उसे जीवन दान दिया। बुजुर्ग महिला को कुछ ही दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती किया गया था। 

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दिल और फेफड़े संबंधी रोगों से पीड़ित मरीज की कूल्हे की हड्डी भी टूट गई थी। डॉ. मनोज और डॉ. वीके साहनी ने इस केस पर गहन अध्ययन के बाद ऑपरेशन किया। चूंकि मरीज के शरीर में संक्रमण भी फैल गया था। इसलिए ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को जटिल चुनौतियों से गुजरना पड़ा।
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करीब 18 दिन तक भर्ती रहने के दौरान महिला मरीज को विशेष चिकित्सा दी गई। डॉक्टरों का कहना है कि बुजुर्ग मरीजों में कमजोर हड्डी होने के कारण कूल्हा या घुटने में फ्रैक्चर होने की आशंका कई गुना ज्यादा रहती है। इसलिए अपने घर में मौजूद बुजुर्गों को लेकर सावधानी बरतें।

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सर्जरी के बाद 60 साल की महिला फिर हो सकीं खड़ी

एक वर्ष पहले गिरने की वजह से फ्रैक्चर होने के बाद एक महिला मरीज दोबारा से अपने पैरों पर खड़ी हो सकी हैं। गिरने की वजह से लिगामेंट चोटिल हो गया था। महिला को ऑर्थराइटिस की परेशानी भी होने लगी थी।

भारतीय मूल की फिजियन नागरिक मायावती का रयूमेटायड आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस और कमजोर हड्डियों की वजह से चलना-फिरना तक बंद हो गया था। 60 वर्षीय ये महिला मरीज अपनी परेशानी लेकर वसंत कुंज स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर पहुंचीं।

यहां डॉ. विवेक महाजन ने बताया कि मरीज की जांच के बाद पता चला कि घुटने के पास हुआ फ्रैक्चर ठीक नहीं हुआ था, जिसके चलते उस हिस्से में गंभीर डिफॉर्मिटी हो गई थी और लिगामेंट भी सही ढंग से काम नहीं कर रहा था।

उन्होंने बताया कि पूरे केस पर अध्ययन के बाद सर्जरी में खास इंप्लांट का इस्तेमाल किया। आमतौर पर इस इंप्लांट को घुटने की रिवीजन रिप्लेसमेंट सर्जरी में लगाया जाता है। ऑपरेशन के बाद बेहतर दवाओं के जरिये मरीज की रिकवरी हुई। सर्जरी के दो दिन बाद ही मरीज ने फिर जमीन पर पैर रखना शुरू किए।

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